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30 प्रतिशत तक बढ़ने वाली है फीस

महँगाई की मार से कराह रही जनता पर अब एक और चोट पड़ने वाली है। लखनऊ के स्कूलों में आगामी सत्र से पढ़ाई और महँगी हो जाएगी। अभिभावकों पर फीस के मद में 10 से 30 फीसदी बोझ बढ़ाने की तैयारी है। स्कूलों का तर्क है कि टीचरों की तनख्वाह का खर्चा बढ़ जाने की वजह से फीस बढ़ानी पड़ रही है। कई स्कूल तो छठे वेतन आयोग की दुहाई दे रहे हैं। कई स्कूलों ने फीस वृद्धि का नोटिस पेरेंट्स को भिजवा दिया है।ड्ढr फीस बढ़ाने वाले स्कूलों में सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड के स्कूल हैं और प्लेग्रुप से लेकर इण्टर कॉलेज तक के हैं। फीस बढ़ाने के लगभग सभी के तर्क समान हैं कि टीचरों के वेतन का खर्चा काफी बढ़ गया है या बढ़ने वाला है। सेंट फ्रांसिस, लामार्टीनियर तथा कैथ्रेडल जसे विद्यालयों में फीस वृद्धि तय है। सिटी माण्टेसरी स्कूल ने सभी कक्षाओं में लगभग 15 फीसदी फीस बढ़ाने की तैयारी की है। विद्यालय के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी हरिओम शर्मा ने कहाकि बढ़ी फीस जुलाई से लागू होगी। उन्होंने कहा कि सीएमएस ने अपने शिक्षकों को छठे वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देने का निर्णय लिया हैं। जिसके लिए फीस बढ़ानी पड़ेगी। शिक्षकों को इसका लाभ जुलाई से मिलेगा। आरएलबी के निदेशक मधुसूदन दीक्षित कहते हैं कि शिक्षकों के वेतन पर खर्च बढ़ने से 10 से 15 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रस्ताव है। लखनऊ पब्लिक कॉलिजिएट के प्रिंसिपल जावेद आलम ने कहा कि अच्छे टीचर तभी विद्यालयों में रुकेंगे जब उन्हें अच्छी सैलरी मिलेगी। इसके लिए फीस में कुछ वृद्धि करना जरूरी हो गया है। एसकेडी के मनीष सिंह ने 10 प्रतिशत तक फीस वृद्धि की बात कही है। दिल्ली पब्लिक स्कूल में अभी फीस वृद्धि पर निर्णय नहीं हो सका है। हमारा कोई कंट्रोल नहींड्ढr सीबीएसई और आईसीएसई के स्कूलों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हम तो सिर्फ स्कूलों को एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) देते हैं। जहाँ तक यूपी बोर्ड के स्कूलों की बात है, इस बारे में माध्यमिक शिक्षा निदेशक से बात की जाएगी।ड्ढr रवि प्रताप वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक

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