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ऐतिहासिक ओपेरा थिएटर गिन रहा है अंतिम सांसें

शिलांग का ऐतिहासिक ओपेरा थिएटर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। इस थिएटर में एक समय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाषण और उस्ताद अलाउद्दीन खान के सितार की गूंज सुनाई दी थी।

यह हाल केवल शिलांग के ओपेरा थिएटर का नहीं है। देश के कई इलाकों में ओपेरा थिएटरों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनती जा रही है। मुख्य रूप से इसके दो कारण हैं। पहला, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की प्राथमिकताएं बदलने लगी है। और ओपेरा थिएटरों की व्यावसायिकता इससे खासी प्रभावित हुई है। दूसरे इसके रख रखाव पर भी उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अब शिलांग के इस ओपेरा थिएटर को एक नई इमारत में स्थानांतरित किया जा रहा है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने के इस थिएटर से लोगों की भावनाएं जुड़ी़ हुई हैं। इसलिए लोग इसे ढहाने के प्रस्ताव से दुखी हैं।

लगभग 7025 फीट के क्षेत्र में फैले इस थिएटर की नींव 1990 में ड्रामा का शौक रखने वाले युवाओं के एक समूह ने रखी थी। कुछ ही समय बाद यह इमारत इलाके में कला का केंद्र बन गई और यहां टेबल टेनिस की प्रतियोगिता से लेकर म्यूजिकल शो, राजनीतिक समारोह और ड्रामा होने लगे।

इमारत के स्थानांतरण के विरोध में अभियान चला रहे गिटी नाट्य समाज के सचिव ए दासगुप्ता ने कहा यह हॉल सभी सांस्कतिक गतिविधियों का केंद्र है। यहां कम से कम 2000 नाटकों का मंचन हुआ है। दासगुप्ता का मानना है कि अगर ओपेरा हाउस को गिराया गया तो एक ऐतिहासिक इमारत नष्ट हो जाएगी। संगठन ने इसके लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया है।

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