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अधिकारों के साथ हम कर्तव्यों पर भी ध्यान दें

मानवाधिकार संरक्षण का मूलभूत सिद्धांत है कि हम दूसरों के साथ भी वैसा ही व्यवहार करें, जैसा अपने प्रति दूसरों से चाहते हैं। तभी मानवाधिकारों का वास्तविक रूप में संरक्षण संभव होगा।

हम सब अधिकारों की बात तो करते है, लेकिन अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते। यदि हम अपने कर्तव्यों का ही पूरी ईमानदारी के साथ पालन करें तो मानवाधिकारों का संरक्षण स्वत: ही हो जाएगा। वास्तव में व्यक्तिगत अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

देश ने आजादी के बाद के 60 वर्षों में हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है, लेकिन मानवाधिकारों के क्षेत्र में हम आज भी जागरूक नहीं है। आज भी गरीबी, बेरोजगारी, कुप्रथाएं देश में व्याप्त हैं, जिनके चलते मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। इसकी प्रमुख कारण है सामाजिक सहभागिता का अभाव। सहभागिता का सीधा अर्थ है एक-दूसरे की जरूरतों व संवेदनाओं का खयाल रखना। ये समस्याएं सहभागिता से ही दूर हो सकती हैं।

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