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कॉपीराइट के पेंच में फंसी गूगल की ई-बुक योजना

कॉपीराइट के पेंच में फंसी गूगल की ई-बुक योजना

दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल की ग्राहकों को ऑन लाइन पुस्तकें उपलब्ध कराने की ई-बुक योजना को पेरिस की एक अदालत ने कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।

फ्रासं के प्रकाशक समूह ने गूगल के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर रखा था। उनका कहना था कि गूगल द्वारा पुस्तकों को डिजिटल रूप में ऑनलाइन उपलब्ध कराना कॉपी राइट कानूनों का उल्लंघन है।

समूह की अगुवाई करने वाले प्रकाशन ला मार्टिनियर का आरोप था कि गूगल की इस योजना से पुस्तकों के लेखक और प्रकाशकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

प्रकाशको ने यह दलील भी दी थी कि गूगल द्वारा लेखकों और प्रकाशकों को बिना पैसे दिए पुस्तकों का स्कैन करना एक तरह से उनकी प्रतियां बनाने जैसा ही है जो कॉपीराइट कानूनों का सरेआम उल्लंघन है।

मार्टिनियर प्रकाशक के वकील ने कहा कि गूगल की ओर से इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील के पहले ही उसकी ई-बुक योजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लग सकती है। गूगल अपनी इस योजना के तहत दुनिया के कई बेहतरीन और जाने-माने लेखकों की अब तक एक करोड पुस्तकों का स्कैन कर चुका है। गूगल ने जिन किताबों को स्कैन किया है उनमें मात्र 10 लाख किताबें ही कॉपीराइट कानूनों से मुक्त हैं, बाकि 90 लाख किताबें कॉपीराइट से संरक्षित हैं। हालांकि कॉपीराइट के झमेले से बचने के लिए गूगल ने कॉपीराइट से मुक्त किताबों को ही डाउनलोड योग्य बनाया है। बाकी किताबें यूजर पढ़ जरूर सकते हैं, लेकिन उसे डाउनलोड नहीं कर सकेंगे।

ई-बुक बाजार के बड़े खिलाड़ी गूगल की इस योजना को लेकर सशंकित हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि 2010 ई-पाठकों का होगा। बाजार में अभी से ई-बुक मुहैया कराने के लिए कई कंप्यूटर एप्लीकेशन आने लगे हैं। अमेरिका की बर्न्स एंड नोबल कंपनी अपनी ई-बुक पढ़ने के लिए नई डिवाइस के साथ बाजार में उतर चुकी है। अमेरिका की ही अमेजन कंपनी ने घोषणा की है कि वह ई-बुक संस्करण के लिए किंडल तकनीक को लांच करेगी। यह तकनीक गूगल के तकनीक से बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन अपने साथ अमेरिका के 60 फीसदी ई-बुक पाठकों को खिंचेगी।

ऐसे में गूगल को अमेजन से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। हालांकि आने वाले वक्त में गूगल कोशिश कर सकता है कि अमेजन अपनी किताबों तक पहुंच मुहैया करा दे। लेकिन अमेजन गूगल की बजाय एप्पल को अपना कड़ी प्रतिस्पर्धी मान रहा है। क्योंकि एप्पल के पास अभी ही कम से कम ई-बुक के 600 एप्लीकेशन हैं। ई-बुक बाजार में अपनी धाक जमाने के लिए कंपनियों में अव्वल कौन होगा यह तो भविष्य की बात है, लेकिन फिलहाल गूगल की ई-बुक योजना पर कॉपीराइट का साया पड़ गया लगता है।

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