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बहुमंजिले मकान

बहुमंजिले मकान

निरंतर बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण अब छोटे-बड़े सभी शहरों में बहुमंजिले आवासीय भवन बनने लगे हैं। इसके अलावा बड़े नगरों तथा महानगरों में रेलवे, विद्युत, बीमा निगमों, कारखानों, बैंकों के कर्मचारियों तथा अन्य सेवाकर्मियों की आवास व्यवस्था के लिए बहुमंजिले आवासीय भवन बनाना अनिवार्य हो जाता है। ऐसे आवासों को भी वास्तु शास्त्र के नियमानुसार बनवाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो ये आवास उनमें रहने वाले परिवारों के लिए अत्यंत दु:खदायी, हानिप्रद और कष्टदायक हो जाते हैं। अत: बहुमंजिले आवासीय भवन को वास्तु नियमों के अनुसार बनवाना चाहिए :-

बहुमंजिले आवासीय भवन में पुस्तकालय की व्यवस्था नैर्ऋत्य कोण में करनी चाहिए।
ट्रांसफॉर्मर तथा जनरेटर आदि आग्नेय कोण में स्थापित करें।
विद्यालय आदि की स्थापना वायव्य कोण या उत्तर दिशा में करना श्रेष्ठ रहता है।
पूजा स्थल का निर्माण उत्तर-पूर्व में कराना चाहिए।
वाटर टैंक, स्विमिंग पूल या अंडरग्राउंड टैंक आदि की व्यवस्था पूर्व दिशा में करनी चाहिए।
आवासीय परिसर के चारों तरफ 4-5 फुट ऊंची चारदीवारी अर्थात बाउंड्री वाल अवश्य बनवानी चाहिए।
मुख्य प्रवेश द्वार के समीप बगीचा या खेल का मैदान होना चाहिए।
आवासीय परिसर के आसपास लंबे एवं घने वृक्ष नहीं होने चाहिए। इससे भवन की सुंदरता में कमी आती है। साथ ही विभिन्न प्रकार के फूल-पत्ताें से आसपास की जगह भी खराब हो जाती है।
पार्किग आदि की व्यवस्था उत्तर-पूर्व में करना चाहिए।
मोटर गैरेज का निर्माण उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में करना चाहिए।
प्रत्येक फ्लैट की बालकनी उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए।
सीढ़ियों का निर्माण यथासंभव दक्षिण या पश्चिम में करना शुभ होता है।
प्रत्येक फ्लैट का शौचालय दक्षिण दिशा में रखना चाहिए।
प्रत्येक प्लैट का रसोईघर पूर्व या आग्नेय कोण अथवा पूर्व एवं आग्नेय कोण के मध्य रखना चाहिए।
प्रत्येक प्लैट का स्नानघर उत्तर, पश्चिम, पूर्व अथवा दक्षिणी नैर्ऋत्य में बनवाना उचित होता है।

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