class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

क्रिसमस का उपहार

क्रिसमस का उपहार

जेनी बहुत ही होनहार व प्रतिभाशाली लड़की थी। उस के माता-पिता बहुत गरीब थे। जेनी के पिता राबर्ट एक अमीर व्यक्ति विल्सन के घर पर ड्राईवर थे। जेनी आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। उसे फिल्मों का बहुत शौक था। वह बड़ी होकर हीरोइन बनना चाहती थी। उसे लगता था कि हीरोइन बनने के लिए फिल्मी किताबें पढ़ना, हीरो-हीरोइन के पोस्टर देखना व उनके जैसे कपड़े पहनने का अभ्यास करना जरूरी है। इसलिए  कुछ दिनों से वह जेब खर्च के रुपयों को बचाकर उनसे हीरो-हीरोइन की तस्वीरें, किताबें आदि खरीदती थी। कुछ ही दिनों में उसे फिल्मी खबरें इतनी चटपटी लगने लगीं कि वह अब तरह-तरह की फिल्मी किताबें पढ़ने लगी। किताबें खरीदने के लिए रुपए तो चाहिए ही, इसलिए वह जरूरी सामान के लिए रखे गए रुपयों से भी पत्रिकाएं खरीद डालती।

एक दिन जब जेनी के पिता अपने मालिक विल्सन को लेकर कहीं जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें जेनी एक फिल्मी पत्रिकाओं की दुकान पर खड़ी नजर आई। उसने वहां पर जेनी को कुछ नहीं कहा। घर पहुंचने पर उसने जेनी से इस बारे में पूछताछ की तो जेनी झूठ बोलने लगी। उसे झूठ बोलते देख कर राबर्ट का गुस्सा बढ़ता गया। बात बढ़ते देख कर जेनी की मां जूली बीच-बचाव के लिए आई और जेनी को अपने कमरे में ले गई। फिर उसने राबर्ट को समझाया कि मारने-पीटने या धमकाने से वह नहीं सुधरेगी बल्कि इसका इलाज प्यार और सही मार्गदर्शन ही है। राबर्ट जूली की समझदारी भरी बातें सुनकर संतुष्ट हो गया और उसने जेनी को सुधारने की जिम्मेदारी जूली पर डाल दी।

एक दिन जब जेनी अपना स्कूल का काम निपटा रही थी तो जूली एक फिल्मी पत्रिका निकाल कर लाई और उसे जेनी को दिखाने लगी। फिर वह जेनी से बोली, ‘बेटा, हीरो-हीरोइन कितने आकर्षक और खूबसूरत लगते हैं न।’ जेनी मां को फिल्मों के बारे में बातें करते देख हैरान हो गई। जूली, जेनी के भावों को समझकर बोली, ‘बेटा, किसी भी लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होता। उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है फिर वह चाहे हीरो हीरोइन ही क्यों न हों?’ मां को यह बोलते देख कर जेनी जिज्ञासा से बोली, ‘मां क्या फिल्मों में काम करने वाले कलाकारों को भी मेहनत करनी पड़ती है।’ जूली तो जैसे जेनी के इसी सवाल का इंतजार कर रही थी। वह बोली, ‘और क्या बेटा, आजकल तो हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा हो गई है फिर, चाहे वह क्षेत्र फिल्मों का ही क्यों न हो। आजकल तो फिल्मों में काम करने के लिए पहले ग्रेजुएशन करनी पड़ती है। इसके बाद ऐक्टिंग का कोर्स करना पड़ता है। काम पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जेनी यह सुनकर हैरान रह गई। वह बोली, ‘मां, फिर तो हीरो-हीरोइन बनने के लिए पहले पढ़ाई ज्यादा जरूरी है, फिर एक्टिंग वगैरह।’ ‘बिल्कुल बेटा, और जो लोग यह सब करने के बाद भी फिल्मी दुनिया में सफल नहीं हो पाते वे पढ़े-लिखे होने पर अन्य काम कर अपनी जीविका चला सकते हैं। किंतु यदि व्यक्ति पहले शिक्षित नहीं होगा तो वह कुछ भी नहीं कर सकता।’ मां की बातें सुनकर जेनी को असलियत समझ आ गई। इसके बाद वह सो गई।

अगले दिन क्रिसमस था। वह सुबह जल्दी उठी और नहा-धोकर चर्च जाने के लिए तैयार हो गई। जब उसके माता-पिता ने उसे क्रिसमस का उपहार दिया तो वह खुशी से चहक उठी। उपहार लेने के बाद वह अपने माता-पिता का हाथ पकड़कर बोली, ‘आज मैं भी आप दोनों को क्रिसमस का उपहार देना चाहती हूं और वह यह कि मैं आज से मन लगाकर पढ़ाई करूंगी और कभी भी अपना ध्यान फालतू बातों में नहीं लगाऊंगी। मां ने मुझे पढ़ाई का महत्व समझा दिया है।’ इसके बाद वह अपनी मां के गले लग गई। राबर्ट व जूली अपनी बेटी का क्रिसमस का इतना सुंदर उपहार पाकर बहुत खुश थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:क्रिसमस का उपहार