DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कोपनहेगन में समझौता करने के करीब हैं नेता: जयराम

कोपनहेगन में समझौता करने के करीब हैं नेता: जयराम

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार रात कहा कि भूमंडलीय तापमान में वृद्धि से निपटने के लिये कोपनहेगन में हो रही जलवायु परिवर्तन संबंधी वार्ता में विश्व के नेता कानूनी रूप से गैर-बाध्यकारी समझौता करने के करीब हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन, ब्राजील तथा दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ हुई मुलाकात के बाद रमेश ने कहा कि कुछ देर में, कानूनी रूप से गैर-बाध्यकारी कोपनहेगन समक्षौता होने की उम्मीद है। ओबामा की इन नेताओं के साथ बैठकें पहले से तय नहीं थीं।
   
रमेश ने कहा कि अमेरिकियों के साथ बातचीत सफल रही। ओबामा ने बेसिक देशों के नेताओं के साथ मुलाकात की, जिस दौरान ताजा मसौदे के नतीजे पर चर्चा हुई। इस 12 दिवसीय सम्मेलन के तय समय से अधिक देर चलने और गहन बातचीत होने के बाद एक समझौता होने की संभावना है।

इससे पहले जलवायु परिवर्तन पर एक समझौते को आकार देने की कोशिश के तहत विश्व के नेताओं ने शुक्रवार को देर रात तक चर्चा जारी रखी और इसी के चलते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी डेनमार्क की राजधानी से अपने प्रस्थान को टाल दिया। सिंह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तथा अन्य नेताओं के साथ चर्चा में शामिल हुए हैं।

भूमंडलीय तापमान में वृद्धि की चुनौती से निपटने के समाधान पर शिखर सम्मेलन में आम सहमति नहीं बन पाने के चलते बातचीत एक बार फिर शुरू की गयी है। सिंह की डेनमार्क की राजधानी से शाम को रवाना होने की योजना थी। लेकिन वह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह ही आयोजन स्थल पर लौट आये। ओबामा ने भी अपनी वतन वापसी टाल दी है।

आयोजन स्थल पर पहुंचने के तुरंत बाद सिंह ने चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के नेताओं के साथ चर्चा की ताकि ताजा मसौदे के लिये एक रणनीति और साझा नजरिया तैयार किया जा सके। कहा जा रहा है कि यह मसौदा विकासशील देशों की चिंताओं की प्रतिक्रिया में होना चाहिये।

इन नेताओं ने बाद में ओबामा से मुलाकात की। ओबामा की कोपनहेगन में कुछ ही घंटे ठहरने की योजना थी लेकिन उन्होंने भी वापसी के अपने कार्यक्रम को बदल दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के विश्व नेताओं से उनके प्रस्थान को एक दिन के लिये टालने का आहवान करने के बाद इन नेताओं ने अपनी यात्रा योजना में बदलाव किये हैं। गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन से मुलाकात की।
   
दिन में एक नया मसौदा वितरित किया गया, जिसमें भूमंडलीय तापमान में वृद्धि से निपटने के लिये कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि को दिसंबर 2010 की समय सीमा से पहले आकार देने की बात कही गयी। लेकिन भारत और चीन जैसे देश क्योटो प्रोटोकॉल को ही जारी रखने पर जोर दे रहे हैं जिसके तहत विकसित देश एक समय सीमा के भीतर उत्सर्जन में भारी कटौती करने के लिये बाध्य हैं।
   
समझा जाता है कि आस्ट्रेलिया, फ्रांस और डेनमार्क ने पूरी कवायद की 2016 में दोबारा समीक्षा कराने की मांग की है ताकि प्रोटोकॉल को प्रभावी तौर पर विराम दिया जा सके। शिखर सम्मेलन में उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि क्योटो प्रोटोकॉल को एक मान्य और वैध तंत्र बना रहना चाहिये। पक्षों को इसके तहत अपनी गंभीर प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि अगर हम नये और कमजोर प्रतिबद्धता वाले बदलाव को मौन स्वीकृति दे देते हैं तो यह अंतरराष्ट्रीय जनमत के खिलाफ होगा। बहरहाल, सिंह ज्यादा उम्मीदें नहीं रहने की बात बेबाकी से कहते नजर आये, जब उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का नतीजा हमारी अपेक्षाओं से कुछ कम रह सकता है।
   
भारत और अन्य विकासशील देश विकसित विश्व से कानूनी रूप से बाध्यकारी और सुस्पष्ट आश्वासन लेने पर जोर दे रहे हैं जिसमें यह उल्लेख हो कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर वे ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में ठोस कमी लायेंगे। विकासशील देशों का यह रूख है कि चूंकि विकसित देश पर्यावरण में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं, लिहाजा उन्हें जलवायु परिवर्तन का असर कम करने के लिये बड़ी जिम्मेदारी भी उठानी चाहिये।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कोपनहेगन में समझौता करने के करीब हैं नेता: जयराम