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कोपेनहेगन समिट फेल, अब अगले साल मैक्सिको से उम्मीद

कोपेनहेगन समिट फेल, अब अगले साल मैक्सिको से उम्मीद

कोपेनहेगन समिट फेल हो गई है। ग्लोबल वार्मिग कम करने के लिए कार्बन उत्सजर्न के लक्ष्य निर्धारण पर ऐसा पेंच फँसा कि दुनिया दो हिस्सों में बँटती नजर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति बोराक ओबामा ने अपने भाषण में पहले ही यह कहकर सबको निराश कर दिया कि उन्हें कोप-15 के नाकामयाब होने के खतरे नजर आ रहे हैं।
इससे पहले चीन और ब्राजील फिर बाद में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी साफ कर दिया कि बिना क्योटो प्रोटोकॉल और बाली एक्शन प्लान को ध्यान में रखे हुए भविष्य का कोई समझौता नहीं होगा। एक सियासी दस्तावेज आने की उम्मीद जरूर है जिसमें मैक्सिको में होने वाली बातचीत का मसौदा तय होने की संभावना है।

कोपेनहेगन के बेलासेंटर में इस ऐतिहासिक दिन पर माइनस चार डिग्री तापमान पर जितनी बर्फ बाहर जमी हुई थी, उससे कहीं ज्यादा बर्फ विकसित और विकासशील देशों के रिश्तों पर जमी नजर आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक किस्म के शीतयुद्ध की शुरुआत भी हो सकती है जिसमें अमीर व गरीब देश आमने सामने होंगे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में स्पष्ट कर दिया कि इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय समझौता हो पर आगे की कोई भी बातचीत क्योटो प्रोटोकॉल और बाली एक्शन प्लान के हिसाब से ही होगी। जलवायु बदलाव के इन दोनों तकनीकी शब्दावलियों का सार यह है कि सभी देशों को एक अंतरराष्ट्रीय वैधानिक सन्धि के तहत ग्लोबल वार्मिग रोकने के उपाय करने होंगे। निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना होगा। लक्ष्यों को पूरा न करने वालों पर पेनाल्टी होगी।

प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस बारे में तैयार किए गए ड्राफ्ट का फिलहाल अध्ययन कर रहा है। देर शाम तक इस पर कोई फैसला होगा। उधर दूसरी तरफ विकसित देश चाहते हैं कि विकासशील देश इस दिशा में अपने संसाधनों से भी जो काम करेंगे, उनकी अंतरराष्ट्रीय निगरानी होनी चाहिए। इस पर श्यामसरन ने कहा कि ऐसा कहने वाले अगर क्योटो प्रोटोकॉल को मान लें तो कोई दिक्कत ही नहीं होगी क्योंकि उसमें अंतरराष्ट्रीय निगरानी का पूरा इंतजाम है।

इससे पहले विदेश सचिव निरुपमा राव ने बताया कि सुबह भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीनी प्रीमियर वॉन जिआबो से सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत की। इसमें तय किया गया कि दोनों मुल्क इस मसले पर एकदूसरे को लगातार सहयोग करेंगे। भारत और चीन अंतरराष्ट्रीय समूह बेसिक ग्रुप के सदस्य हैं जिसके दो अन्य सदस्य देश ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका हैं। यह सभी देश विकासशील देशों के हितों पर एकमत हैं।

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