अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राहत की राह

कैंसर पर शोध करने वाले ब्रिटिश वैज्ञानिक आखिरकार एक ऐसे मोड़ पर आ गए हैं जिसे वे इस क्षेत्र में मूलभूत बदलाव लाने वाला मोड़ मानते हैं। उन्होंने दो किस्म के कैंसरों में शरीर की कोशिकाओं के जीन्स में जो बदलाव आते हैं उनका ठीक-ठीक नक्शा बना लिया है। यहां से दो दिशाओं में तेजी से बढ़ा जा सकता है। पहली दिशा इलाज की है, अब किसी किस्म के कैंसर में होने वाले बदलाव रोकने वाली खास दवाएं ढूंढी जा सकेंगी। अभी तक लगभग हर किस्म के कैंसर का इलाज एक ही तरह से होता है, दवाओं, रेडियेशन या सजर्री से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है या निकाल दिया जाता है।

अब छर्रो वाली भरमार बंदूक जैसे इन इलाजों की बजाए अचूक निशाने वाली बंदूक पाना आसान होगा। दूसरी दिशा उन जैव रासायनिक प्रक्रियाओं की खोज है, जो जीन्स में परिवर्तन की वजह से होती है। स्वस्थ शरीर में पुरानी कोशिकाओं के क्षय और नई कोशिकाओं के बनने में एक जरूरी संतुलन बना रहता है। कैंसर में यह संतुलन नष्ट हो जाता हे और कोशिकाओं का बनना अनियंत्रित हो जाता है। वैज्ञानिक अब उस प्रक्रिया को समझने के काफी करीब हैं जिससे शरीर का लगातार और नियंत्रित विकास होता है।

जेनेटिक्स के स्तर पर हुई इस नई खोज से जैव रासायनिक स्तर पर क्षय और विकास की बुनियादी प्रक्रिया तक पहुंचने में आसानी होगी। इस शोध की प्रक्रिया में न केवल कैंसर को रोकने में तरक्की होगी बल्कि ऐसी तमाम समस्याओं के इलाज का रास्ता खुल जाएगा जो अपने ही शरीर की किसी प्रक्रिया या हिस्से के अपने ही दुश्मन बन जाने से होती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि फेफड़ों के कैंसर में जीन्स में लगभग 23,000 और त्वचा के कैंसर में 30,000 बदलाव आते हैं।

अब वैज्ञानिक इस काम में जुटेंगे कि इन हजारों बदलावों में से कौन से बदलाव कौन से जैव रासायनिक बदलाव लाते हैं, यह जानने पर प्रक्रिया पर अचूक मार करने वाली दवा खोजना और इस्तेमाल करना आसान होगा। शायद पांच-सात साल में चिकित्सा विज्ञान उस जगह पहुंच जाए जहां कैंसर के हर मरीज के लिए अलग-अलग अचूक इलाज हो। अभी इसके लिए दुनिया भर में वैज्ञानिक लगातार काम में जुटे हैं। यह भी उम्मीद है कि इन शोधों से बहुत सारे रहस्य खुलेंगे और इलाज पता लगेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राहत की राह