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भारी पड़ रहा गजराज का गुस्सा

वन महकमा हाथियों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। हाथी आबादी क्षेत्र में घुसकर लगातार जान-माल की क्षति पहुंचा रहे हैं। 2000 से अब तक हाथी करीब 90 लोगों की जान ले चुके हैं और लगभग तीन हजार बार फसलों को नुकसान पहुंचा चुके हैं।

जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप और चारे-पानी की कमी के कारण हाथी उग्र हो रहे हैं। राजाजी राष्ट्रीय पार्क के लगभग आधे हिस्से में लैंटाना पांव पसार चुका है। चारा घास तेजी से खत्म हो रही है। साथ ही पानी के मुख्य स्नोतों में 40 फीसदी से अधिक की कमी आई है।

ऐसी ही स्थिति लगभग कार्बेट पार्क की भी है। इससे हाथी भोजन व पानी की तलाश में तेजी से आबादी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। गत पांच वर्षो में केवल इन दोनों पार्को में ही 17 लोगों की जान ले चुके हैं और लगभग 23 लोग घायल हुए हैं।

पार्क से सटे आबादी एरिया में हाथियों के घुसने की घटनाओं को रोकने में वनाधिकारी असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। डायरेक्टर राजाजी एसएस रसाईली का कहना है कि पार्क क्षेत्र में लोगों की आवाजाही रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।

लोग घास व लकड़ी के लिए बेधड़क जंगलों में घुसकर हाथियों की शांति में खलल डालते हैं। जिससे हाथी उग्र होकर लोगों पर हमला कर देते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को पार्क क्षेत्र में न घुसने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्क के भीतर हाथियों को पर्याप्त मात्र में चारा व पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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