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समाज सेवा के साथ छात्रों को पॉकेटमनी भी

कॉलेज छात्रों को समाज और जीवन के प्रति जिम्मेदारी की समझ होने लगी है। पेरेंट्स पर बोझ न बन कर वे अब स्वयं सेवी संस्थाओं (एनजीओ) में करियर ढूंढने लगे हैं। व्यवहारिक ज्ञान के साथ बेहतर करियर ऑप्शन भी छात्रों के जुड़ने की सबसे बड़ी वजह है।

हिंदी मूवी ‘कमीने’ में शाहिद कपूर ने ‘ये भवरां काटे न, के नैय्या डूबे न.. ’ गाकर पढ़ाई के साथ एड्स जागरुकता अभियान चलाया। ऐसे ही डीयू में बीए-प्रथम की छात्र मधु पिछले एक वर्ष से ‘महक’ संस्था के साथकाम कर रही हैं। इनके साथ जुड़ने पर ‘अर्न व्हाइल लर्न’ का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है। समाज को जागृत करने का कार्य भी कर रही हैं। मधु बताती हैं कि संस्था से उसे पांच हजार रुपए प्रति महीना मिलता है। काम करने पर समाज में छुपी कुरीतियों की जानकारी मिलती है। लोगों को उनसे बचने के उपाय बताकर आत्मसंतुष्टि का एहसास होता है। समाज की गहन कुरीतियों को खत्म करने के उद्देश्य से छात्र इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे हैं। मधु की मानें तो समाज में ‘चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूजमेंट’ और एड्स के प्रकोप को कम करने के लिए वह इस संस्था के साथ हैं।

नेहरु कॉलेज के एमए इतिहास के छात्र अनिल दिन में कॉलेज में पढ़ते हैं। शाम को एनजीओ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड नाटक और कविताओं के माध्यम से लोगों में एड्स जागरुकता फैला रहे हैं। अनिल का कहना है कि समाज सेवा में अच्छा भविष्य है। शिक्षा प्राप्त करने के साथ अपने खर्च के लिए अच्छी कमाई भी हो जातीहै। पढ़ाई के दौरान एनजीओ से तीन हजार से आठ हजार रुपए तथा फुल टाइम एनजीओ के साथ जुड़ने पर 10 से 25 हजार रुपए तक की कमाई हो जाती है।

इनके अलावा शहर के डीएवी कॉलेज, बल्लभगढ़ के अग्रवाल कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सियों के करीब 50 छात्र‘एसोसिएशन फॉर चिल्ड्रन एनहेंसमेंट’, ‘महक’, ‘उपकार मंडल’ औरँ ऐसी ही एनजीओ से जुड़ कर काम कर रहेहैं।

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