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दिनाकरन को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति की अनुशंसा वापस

दिनाकरन को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति की अनुशंसा वापस

उच्चतम न्यायालय के चयन मंडल (कॉलेजियम) ने कर्नाटक के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरन को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति देने की अपनी अनुशंसा को समाप्त करने का निर्णय किया है। इसके साथ ही भूमि पर कब्जा करने के आरोपों का सामना कर रहे दिनाकरन पर महीनों से जारी विवाद भी खत्म हो गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि निर्णय किया जा चुका है।

प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व वाले चयन मंडल की गुरुवार शाम बैठक हुई और उनकी पदोन्नति की अनुशंसा को वापस लेने का निर्णय किया गया। चयन मंडल में न्यायमूर्ति एसएच कपाड़िया, न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी, न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन शामिल हैं।

इससे पहले कानून मंत्रालय ने चयन मंडल के 27 अगस्त के निर्णय को खारिज कर दिया था और इससे निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा था। राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने गुरुवार को सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस को स्वीकार कर लिया, जिसके अनुसार भूमि कब्जा के आरोपों में दिनाकरन पर महाभियोग शुरू होना है ।

सभापति संभवत: तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे, जिसमें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक कानूनविद शामिल होंगे। यह समिति नोटिस की जांच करेगी और महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपना विचार देगी।

न्यायिक कार्यों से अलग चल रहे दिनाकरन ने इस्तीफा देने से इनकार किया है और राज्यसभा में उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
 न्यायमूर्ति दिनाकरन ने कहा है कि उनके खिलाफ भूमि कब्जा का आरोप निराधार एवं असत्य है और दावा किया कि वह साबित कर सकते हैं कि उनके परिवार के पास एक निश्चित सीमा से ज्यादा भूमि नहीं है।

राज्यसभा में उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि इस पर किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। उन्होंने कहा था कि मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति मेरी ओर से नहीं, बल्कि पूरी वास्तविकता पर ध्यान नहीं देने और उपलब्ध पूरे तथ्यों पर विचार नहीं करने को लेकर है।

अपने खिलाफ आरोपों को बिना किसी सबूत और बिना किसी आधार पर होने का दावा करते हुए दिनाकरन ने कहा कि आयकर रिटर्न से यह पता चल जाएगा कि यह भूमि दिसंबर 1996 में उनके न्यायाधीश बनने से पहले के हैं।

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