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दिनकरन के खिलाफ महाभियोग याचिका मंजूर

दिनकरन के खिलाफ महाभियोग याचिका मंजूर

न्यायाधीश पीडी दिनकरन के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति मोहम्मद हामिद अंसारी ने गुरुवार को स्वीकार कर लिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सभापति ने यह प्रस्ताव चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया है। राज्यसभा के 75 सांसदों का हस्ताक्षरयुक्त एक प्रस्ताव गत सोमवार को सभापति को सौंपा गया था जिसे अंसारी ने गुरुवार स्वीकार कर लिया है।

ज्ञातव्य है कि न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या राज्य के हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश के समकक्ष किसी व्यक्ति को केवल संविधान की धारा 124 (चार) के अंतर्गत महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है। न्यायाधीश जांच कानून 1968 के मुताबिक लोकसभा के 100 सांसद या फिर राज्यसभा के 50 सांसदों द्वारा एक प्रस्ताव लाकर ही किसी न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।

सांसदों द्वारा हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति या फिर लोकसभा के अध्यक्ष को दिया जाता है। इसके बाद पीठासीन अधिकारी यानी प्रिसाइडिंग आफिसर तीन सदस्यीय एक समिति का गठन करेगा जो यह तय करेगी कि यह मामला महाभियोग के लिए फिट केस है या नहीं।

इस समिति में दो न्यायाधीश होते हैं, यदि किसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ मामला हो तो समिति में एक सुप्रीम कोर्ट का और दूसरा किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश होता है। यदि शिकायत सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ हो तो समिति में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीश होंगे और एक न्यायविद।

ज्ञातव्य है कि कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति के आरोपों के कारण उनकी पदोन्नति भी रोक दी गई थी। हालांकि उन्होंने देश के चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन से उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया था। इससे पूर्व देश में केवल एक ही बार 1992.93 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था जो गिर गया था।

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