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उर्दू शिक्षकों को नौकरी दे सरकार : सपा

विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद हसन ने बेरोजगार उर्दू मोअल्लिम डिग्रीधारकों पर लाठी चार्ज को बसपा सरकार की हिटलरशाही करार दिया है। गुरुवार को यहाँ प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में सपा का प्रतिनिधिमण्डल राज्यपाल से मिलकर शीघ्र ही ज्ञापन भी देगा।


उन्होंने कहा कि ये डिग्रीधारक प्रशासन को सूचना देकर धरना देने आए थे। क्योंकि 14 अप्रैल 2008 को बसपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी जिसमें बेसिक शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इन डिग्रीधारकों को आश्वासन के बाद भी नियुक्ति नहीं दी गई। क्योंकि मायावती सरकार इनकी माँगों को हमेशा टालती रही है। डिग्रीधारकों ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए कूच क्या किया कि पुलिस ने उन पर बर्बर लाठीचार्ज कर दिया। इससे बड़ी अलोकतांत्रिक कार्रवाई हो नहीं सकती। प्रजातंत्र में सबको अपना हक माँगने में अधिकार है।


इन करीब पाँच हजार डिग्रीधारकों को भी यह अधिकार है। लेकिन मायावती सरकार को इससे कोई वास्ता नहीं कि किसी को लोकतांत्रिक अधिकार मिले। श्री हसन ने कहा किर मोअल्लिम-ए-उर्दू को 1994 में बीटीसी उर्दू के बराबर दर्जा देकर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 5000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती की थी। लेकिन 1997 में भाजपा सरकार ने उस पर रोक लगा दी थी। श्री हस ने कहा कि समाजवादी पार्टी इन डिग्रीधारकों के आंदोलन में उनके साथ है और उन पर लाठीचार्ज की कड़ी निन्दा करती है। जिन्होंने इन पर लाठीचार्ज किया उनके खिलाफ मुकदमा लिख कर जेल भेजा जाए। मायावती सरकार इन डिग्रीधारकों को तुरंत नौकरी दे।

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