DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अपना काम होता जाए

मैं आधे घंटे से लगातार हंसे जा रहा था। हंसने की मुद्रा ऐसी थी, जिसे कि हंस-हंसकर दोहरा हो जाने की संज्ञा भी दी जा सकती थी। मेरे मुख से बार-बार एक ही बात निकल रही थी, ’शर्माजी, आप भी गजब ही करते है।’
हालांकि न तो शर्माजी कोई गजब कर रहे थे और न ही कोई ऐसी कालजयी व्यंग्य रचना सुना रहे थे कि हंसने का भाव निरंतर आधे घंटे तक कायम रहे। मैं फिर भी लगातार हंसे जा रहा था, कारण सिर्फ यही था कि मुझे शर्माजी से काम निकालना था। काम निकालना एक कला है, जिसकी सामान्य शर्तों में, बेवजह हंसकर उसे मान्यता दिलाना भी शामिल है।

हंसना-मुस्कराना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन केवल मात्र हंसने से ही कार्य हो जाएगा, यह एक गलत अनुमान है। काम निकालना एक सूक्ष्म किस्म का मनोविज्ञान है। इसीलिए मैंने शर्माजी की आदतों, चरित्र व व्यवहार का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद मैंने महसूस किया कि शर्माजी की आदतों व शौक के बारे में जानकारी इकट्ठी करना अतिआवश्यक है। वे क्या खाते हैं, क्या पीते है, उन्हें पान, बीड़ी, सिगरेट, शराब-जुआ आदि का शौक है या नहीं। कौन सी मिठाई उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक रहती है, कौन से किस्म के मदिरापान से उनकी कृपादृष्टि कायम रहेगी, वगैरह।

लेकिन उनके शौक व आदत जानने मात्र से काम नहीं चल पाता। बल्कि उन वस्तुओं की सतत आपूर्ति भी बनाए रखनी पड़ती है। काम कराने वाले विज्ञान के अनुसार संबद्ध व्यक्ति से संबंध-विस्तार का कार्य, उनकी जीवन-अवधि के अनुसार तय करना पड़ता है। यदि केवल एक ही काम पड़े तो मात्र व्यक्ति-पूजा से ही उचित फल की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन व्यक्ति अगर लंबे समय तक काम आए तो यहां चिंतन की गुजांईश है। शर्माजी के मामले में मैने यही किया। एक दिन मिठाई के डिब्बे लेकर बकायदा गृहप्रवेश संस्कार संपन्न किया। परिवार की जिम्मेदारियों को वहन करते हुए मैंने भाभी जी व बच्चों की अभिरूचियां जानी। मैं उनको पूर्ण करने में कहां तक सफल रहा, यह तो मैं नहीं जानता, किन्तु शर्माजी द्वारा लगातार मेरा काम निकालने के कारण मैं संतुष्ट अवश्य हूं।

उनका कौन सा रिश्तेदार कहां रहता है, किससे उनकी बनती है, किससे नहीं, भाभीजी को कौन ठीक लगता है, कौन नहीं, ये सभी जानकारियां मैंने अपने दिमागी कम्पयूटर में फीड कर रखी है। अब जब तक शर्माजी नहीं रहेंगे तो फिर वर्माजी, फिर गुप्ताजी, या फिर कोई ’जी’, अपने को तो लगातार काम निकालना पड़ता है। यह तो अपनी नियति है। कोई सा भी जी आए, काम होता रहे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अपना काम होता जाए