अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिस्मिल्लाह खां के पुत्र नैय्यर हुसैन का इंतकाल

श्वास व हृदय रोग से पीड़ित होने के कारण बीएयू अस्पताल में भर्ती थे
हड़हा स्थित पैतृक आवास में शोक संवेदना देने वालों का लगा रहा तांता
फ़ातमान स्थित कब्रगाह में देर शाम किया गया सुपुर्देखाक

भारतरत्न स्व. उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बेटे शहनाई वादक नैय्यर हुसैन ‘बिस्मिल्लाह’ जुमेरात को दुनिया छोड़ गये। 69 वर्षीय नैय्यर श्वास व हृदय रोग से पीड़ित होने के कारण कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। वह अपने पीछे अहेलिया (पत्नी), चार पुत्र व तीन बेटियां छोड़ गये हैं। पिता की सोहबत में शहनाई वादन की बारीकियां सीखकर बड़े हुए और उन्हीं के साथ दुनियाभर के कई प्रमुख आयोजनों में कार्यक्रम पेश कर चुके नैय्यर एक निजी हॉस्पिटल के बाद बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती थे। बीमार के कारण ही वे गत दिनों अपनी बेटी शैला और शुमैल के निकाह में शामिल नहीं हो सके थे। देर शाम उन्हें फ़ातमान स्थित कब्रगाह में वाल्दा ‘मुग्गन बीबी’ की कब्र के पास सुपुर्देखाक किया गया। मौलाना ज़हीन हैदर ने नमाजे जनाजा पढ़ाया और अंजुमने हैदरी के सदस्यों ने नौहाख्वानी की।


‘उस्ताद’ के पांच बेटों में दूसरे नंबर के नैय्यर का जन्म 22 अप्रैल 1940 को हुआ था। सुबह क़रीब 8 बजे उनके इंतक़ाल की ख़बर सुनते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गयी। अस्पताल से उनका जसद-ए-ख़ाकी (पार्थिव शरीर) सराय हड़हा स्थित आबाई मकान (पैतृक आवास) पर लाया गया। मौक़े पर ‘उस्ताद’ के सबसे बड़े बेटे हाजी महताब हुसैन समेत ज़ामिन हुसैन, काज़िम  हुसैन व नाज़िम हुसैन और नैय्यर के पुत्र नासिर अब्बास, यावर अब्बास, असद अब्बास, फ़रहत अब्बास आदि सहित परिजन मौजूद थे। घर में शोक प्रकट करने के लिए आने वालों का तांता दिनभर लगा रहा। परिजनों के मुताबिक़ नैय्यर ने अंतिम बार बीते 29 नवंबर को दिल्ली में और 1 दिसंबर को वाराणसी में कार्यक्रम पेश किया था। यह भी इत्तेफ़ाक़ है कि इन्हीं तारीख़ों में उनकी वाल्दा ‘मुग्गन बीबी’ का भी इंतक़ाल हुआ था। मुहर्रम से ठीक पहले यह जहां छोड़ने वाले नैय्यर को अपने पिता की ही तरह नौहा पढ़ने का बेहद शौक़ था। जिसकी एक लाइन ‘मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का’ वह बड़े चाव से पढ़ा करते थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम समेत कई दिग्गजों से सम्मानित हो चुके नैय्यर अपने पिता की ही तरह सादगी पसंद, खुश एख़लाक़, घुलमिल जाने वाली शख़्िसयत संग ग़रीब परवर थे। अपने पिता के संग उन्होंने फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ आदि में संगत किया था। ‘उस्ताद’ के देहावसान के बाद उन्होंने एकल कलाकार के तौर पर पहली बार 2006 में मुंबई के षडमुखानंद हॉल में स्वतंत्र शहनाई वादन पेश किया। उसके बाद तमाम महोत्सवों में भी हिस्सेदारी की।

कुछ प्रमुख कार्यक्रम
अफग़ानिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर (1962), एडिनबर्ग फेस्टिवल लंदन (1965), वर्ल्ड एक्सपोज़ीशन मॉन्ट्रियल (1967), शिराज फेस्टिवल ईरान (1968), कल्चरल फेस्टिवल ऑफ यूनेस्को फ्रांस (1969), वर्ल्ड एक्पोज़िशन जापान (1970), वर्ल्ड म्यूज़िक इंस्टीट्यूट यूएसए (1995), गंगा महोत्सव (2006), लखनऊ महोत्सव (2006) आदि।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बिस्मिल्लाह खां के पुत्र नैय्यर हुसैन का इंतकाल