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बांटने से स्वर्ग जमीन पर नहीं उतरेगा

छोटे-छोटे राज्य बना देने से स्वर्ग जमीं पर नहीं उतर आएगा। स्वर्ग काम करने और प्रबंधन को कुशल बनाने से ही जमीं पर उतरता है। छोटे राज्य प्रशासन के खर्च, प्रशासनिक कार्य में सियासी अवरोध और आम आदमी पर कर के बोझ की बढ़ोतरी ही करते हैं। राज्य की सीमा पार करते ही भाषा एकदम नहीं बदल जाती। भाषा का अपना प्रवाह होता है, विस्तार होता है, रवानगी होती है। उसे सीमाओं में नहीं बांध जा सकता। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि एक राज्य में एक ही भाषा-भाषी हों। कितना ही छोटा राज्य क्यों न हो बहुभाषी रहेंगे ही। फिर बंटवारा क्यों? प्रांतों के बंटवारे की तो बात ही छोड़िए आम आदमी तो भारत-पाक का बंटवारा भी नहीं चाहता था।
सुरेन्द्र कुमार, म. नं.-650, के-ब्लॉक, फेस-2, गोपाल नगर, नजफगढ़, दिल्ली

समझौता थोपने की कोशिश
कार्बन उत्सर्जन और उनके उत्तरदायित्व के बारे में चल रहे सम्मेलन में लगता है पृथ्वी को तबाही से बचाने के बजाए सभी देश अपने राष्ट्रहित में बात कर रहे हैं। कोपनहेगन में जमा हुए देशों का एजेंडा तो है कि कार्बन उत्सर्जन के किसी सर्वमान्य फार्मूले पर पहुंचने की परंतु लगता है इस मसले पर विकसित देशों की नीयत साफ नहीं। विकसित देशों की कोशिश है कि क्योटो प्रोटोकाल से हटकर एक समझौता विकासशील और गरीब मुल्कों के ऊपर थोप दिया जाए, जिसकी वजह से उनके औद्योगिक विकास में ब्रेक लग जाए और वे हमेशा के लिए इन विकसित देशें पर निर्भर हो जाएं। इन देशों ने जो मसौदा तैयार किया है वह अगर लागू हो गया तो जी-77 के देश और चीन कार्बन उत्सर्जन को संभालने के बोझ के नीचे दब जाएंगे।
प्रभात कुमार, डी-17, सरस्वती गार्डन, नई दिल्ली

यह कैसा सम्मान
भारतीय संसद पर आतंकवादियों के द्वारा किए गए हमले पर हमारे कुछ जवान शहीद हो गए उसकी नौंवी बरसी पर संसद भवन में शहीदों की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संसद भवन के प्रांगण में नौंवी बरसी के दौरान केवल ग्यारह संसद सदस्य ही मौजूद थे। यह जरूरी है कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले हमारे शहीदों का इस तरह से अपमान नहीं किया जाए।
बीना रानी टांक, हिन्दू कालेज, दिल्ली विवि, दिल्ली

महिलाओं की परवाह नहीं
महिलाएं जब दुपहिया चला रही होती हैं तब तो वे हेलमेट पहनती हैं और जब वे पिछली सीट पर बैठी होती हैं तो हेलमेट नहीं पहनती। कितने ही एक्सीडेंट केस होते हैं जिनमें आगे सीट पर बैठा व्यक्ति तो दुर्घटना में बच जाता है पर पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति को गंभीर चोट लग जाती है, या फिर जान चली जाती है। महिलाएं फिर भी हमेशा बिना हेलमेट के ही यात्रा करती हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस छूट को समाप्त कर देना चाहिए।
रवि

जनता की बात
सड़क-वाहन अनुपात
ठीक करो यह बात।
खाई जाम-हादसों से मात
करो देश सुनियोजित आबाद।
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

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