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टीम इंडिया टेस्ट में नंबर वन, अब वनडे की बारी

करीब आठ साल पहले की बात है मैं मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत के महान विस्फोटक बल्लेबाज रहे मुश्ताक अली का इंटरव्यू ले रहा था। मैदान में विरेंदर सहवाग शतक ठोक रहे थे, लेकिन मुश्ताक अली के दिलो दिमाग पर सचिन तेंदुलकर छाए हुए थे। उन्होंने कहा, ‘सचिन तेंदुलकर क्रिकेट का कोहिनूर है। मुझे उससे ज्यादा मजा किसी और खिलाड़ी की बल्लेबाजी में नहीं आता।’ मुश्ताक साहब अपने जमाने में बेहद आक्रामक क्रिकेटर माने जाते थे, लेकिन आज अगर वह जिंदा होते तो निश्चित रूप से सहवाग भी सचिन की तरह उनके सबसे चहेते क्रिकेटरों में शुमार होते।

उसी दौरान वनडे क्रिकेट पर चर्चा करते हुए मैंने पूछा, अगर आपके जमाने में वनडे क्रिकेट होती तो 50 ओवर मे कितने रन बनते? तपाक से जवाब मिला, ‘हमारी टीम 400 रन बनाती।’ उस समय यह जवाब सच्चाई से परे ख्वाब देखने वाले अंदाज का लगा था। क्योंकि कोई भी टीम तब तक यह करिश्मा नहीं कर सकी थी। अब यह कोरी हकीकत है, जिसका नजारा पूरी दुनिया देख रही है। भारतीय टीम ने दो साल में वनडे में दो बार 400 से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। इसके अलावा, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका भी दो-दो बार यह करिश्मा कर चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने एक-एक बार 400 से ज्यादा रन बनाए हैं।

वैसे तो टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट की शानदार विजय का सिलसिला 1971 में अजित वाडेकर की कप्तानी में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज जीतकर शुरू हुआ था। लेकिन विश्व स्तर पर टीम की ताकत की ठोस पहचान का असली दौर 1983 में विश्व कप जीतने के साथ ही शुरू हो पाया था। यह अलग बात है कि तमाम आलोचकों ने इसे धुप्पल में मिली जीत भी करार दिया था, लेकिन इसके बाद सुनील गावस्कर के टेस्ट में सर डॉन ब्रेडमैन को पीछे छोड़ सबसे ज्यादा शतक और सबसे ज्यादा रन बनाने और कपिल देव के सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट का रिकॉर्ड स्थापित करने के साथ ही दुनिया ने भारतीय क्रिकेटरों का लोहा मानना शुरू कर दिया था।

इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने चमत्कारी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत को चमत्कृत करते हुए गावस्कर को भी पीछे छोड़ते हुए अनेक मील के पत्थर स्थापित किए, तो अनिल कुंबले ने टेस्ट मैचों में 600 विकेट का पहाड़ लांघते हुए टेस्ट की एक पारी में दस विकेट लेने की उपलब्धि भी हासिल की तो युवराज ने 20-20 के विश्व कप में एक ओवर में छह छक्के जड़ खुद को गैरी सोबर्स की जमात में शामिल कर लिया। इस बीच भारत ने करिश्माई कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के नेतृत्व में 2007 में फटाफट क्रिकेट 20-20 का विश्व चैंपियन होने का गौरव भी पाया।

सहवाग एक बार नहीं दो बार टेस्ट मैचों में तिहरा शतक ठोकने के बाद अभी चंद सप्ताह पूर्व तीसरा तिहरा शतक बना टेस्ट में नया इतिहास रचने से महत सात रन से चूक गए। लेकिन फिर भी निराश होने के बजाए भविष्य के लिए आस बरकरार रखे हुए इस बात का जश्न मना रहे हैं कि उनके रहते भारतीय टीम आईसीसी की विश्व रैंकिंग में नंबर एक के सिंहासन पर विराजमान है। वनडे में कुछ समय नंबर एक रहने के बाद भारतीय टीम अब दूसरे नंबर पर है और अगला लक्ष्य फिर से नंबर एक होने का है। वो दिन कितना ऐतिहासिक होगा जब भारत एक साथ टेस्ट और वनडे में नंबर एक हो जाएगा।

भारत ने 1932 में जब लॉर्डस के ऐतिहासिक मैदान पर सी. के. नायडू की कप्तानी में टेस्ट पदार्पण किया था तो कोई नहीं कह सकता था कि 77 साल का सफर तय करने पर भारतीय टीम टेस्ट की नंबर एक टीम बनेगी क्योंकि भारत को पहली टेस्ट विजय हासिल करने में ही बीस साल लग गए थे। हमारी युवा टीम और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार ढंग से झंडा बुलंद किए हुए हैं। हम टेस्ट में नंबर एक हैं क्योंकि पिछले लगभग 20 माह के दौरान खिलाड़ियों और कोचों ने काफी मेहनत की है। छोटे-छोटे लक्ष्य रखे और उन्हें पूरा करने में जी जान लगाई। हम कितनी देर तक नंबर एक रहेंगे यह कहना मुश्किल है, क्योंकि अगले कुछ महीनों में हमें बहुत कम टेस्ट खेलने हैं और दूसरी टीमें ज्यादा टेस्ट खेल उनमें जीत दर्ज कर हमें पीछे छोड़ सकती हैं। लेकिन अब लक्ष्य वनडे में भी फिर से नंबर एक होने का है। हम ऑस्ट्रेलिया से इस मामले में थोड़ा ही पीछे हैं।

भारत ने टेस्ट में नंबर एक बनने के दौरान ऑस्ट्रेलिया जैसी चैंपियन टीम को झकझोरते हुए मात देकर यह संदेश दुनिया को दिया कि कंगारुओं को हराया जा सकता है। सहवाग, गंभीर और धोनी जिस तरह से टेस्ट में बल्लेबाजी कर रहे हैं उससे टेस्ट क्रिकेट को नया जीवन प्राप्त हुआ है, वरना आलोचकों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि लगातार बोझिल ड्रॉ होने से बहुत जल्दी ही टेस्ट क्रिकेट की मौत हो जाएगी।

पिछले कुछ सालों में भारत के सफलतम कप्तान सौरव गांगुली ने संन्यास लिया, राहुल द्रविड़ ने खुद कप्तानी छोड़ी, अनिल कुंबले ने करियर के अंतिम पड़ाव में कुछ समय कप्तानी संभाली और वर्षो पहले कप्तानी से तौबा करने वाले सचिन तेंदुलकर की सलाह पर युवा महेन्द्र सिंह धोनी को अचानक 20-20 विश्व कप के लिए टीम का कप्तान बना दिया गया। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि पारस पत्थर की सी आलौकिक शक्ति लिए धोनी के नेतृत्व में टीम इतनी तेजी से नई ऊंचाइयों पर चढ़ते हुए नित नए मील के पत्थर स्थापित करेगी।
टेस्ट और वनडे की विश्व रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी का दर्जा भारतीयों से अछूता नहीं रहा है। इस समय आईसीसी अवार्ड में गौतम गंभीर टेस्ट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। धोनी लगातार दो बार से वनडे के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने हुए हैं। आईसीसी की विश्व टेस्ट टीम की कप्तानी धोनी को सौंपी गई है। उनके अलावा सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर भी इसमें हैं। धोनी आईसीसी की वनडे टीम के भी कप्तान हैं। इसमें उनके साथ विरेन्दर सहवाग और युवराज सिंह हैं।

आईसीसी के टॉप बल्लेबाजों की सूची में गौतम गंभीर नंबर एक पर, सहवाग पांचवें और गेंदबाजों में हरभजन सिंह छठे और जहीर खान 10वें नंबर पर हैं। आलराउंडरों हरभजन सिंह 9वें नंबर पर हैं। वनडे में खिलाड़ियों की आईसीसी रैंकिंग को देखें तो धोनी पहले, युवराज सिंह सातवें और सचिन तेंदुलकर आठवें नंबर पर हैं। आलराउंडरों में युवराज सिंह तीसरे नंबर पर हैं।

आगे आने वाले समय में टेस्ट की नंबर एक भारतीय टीम और उसके क्रिकेटर क्या-क्या गुल खिलाएंगे? इसका अंदाजा लगा पाना बेहद कठिन है क्योंकि यह टीम और उसकी युवा ब्रिगेड बेहद भूखी है। जो उसे मिल जाता है उससे वह संतुष्ट नहीं होती और अधिक पाने की ललक उसमें बनी रहती है। इसीलिए दूसरी टीमों पर भारतीय क्रिकेटरों की दहशत है।

पारस बने धोनी
महेन्द्र सिंह धोनी के रूप में भारतीय टीम के पास एक ऐसा ‘पारस पत्थर’ है जो अपनी आक्रामक कप्तानी, बल्लेबाजी और विकेट कीपिंग से अपने साथ-साथ टीम को नई बुलंदियों पर पहुंचा रहा है। वह आईसीसी की टेस्ट और वनडे टीमों के कप्तान हैं। दो बार से वनडे के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने जा रहे हैं। वनडे की रैंकिंग में नंबर-1 हैं। पिछले दस टेस्ट मैचों में धोनी की कप्तानी में भारत ने 7 टेस्ट जीते और कोई नहीं हारा। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया से सीरीज जीती, न्यूजीलैंड को उसके घर में हराया और श्रीलंका को मात दी।

धोनी की कप्तानी और बल्लेबाजी का अंदाज एकदम बिंदास है। इसमें पारंपरिक्ता कम और आधुनिक प्रयोग ज्यादा दिखाई देते हैं। कोई फील्डर गेंद पकड़ने में चूक जाए तो माही की आवाज गूंजती है, ‘जागो, जागो, बाद में सोने का बहुत वक्त मिलेगा।’

लगभग दो साल पहले श्रीसंत की हरकतों पर धोनी से पूछा गया कि, क्या आप उन्हें कुछ समझाते नहीं? जवाब आया, ‘दो-तीन मैच का बैन लगेगा तो अपने आप समझ जाएगा।’ अपने साथी खिलाड़ी के बारे में इस तरह की टिप्पणी कितने कप्तान कर सकते हैं? धोनी की बल्लेबाजी की अपनी तकनीक है, वह कुछ अजब अंदाज में शॉट खेलते हैं, लेकिन जब रंग में होते हैं तो गेंदबाजों की तबीयत रंगीन कर देते हैं। वह अब संभलकर और आक्रामक दोनों अंदाज में जमकर बल्लेबाजी करते हैं। हमेशा आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व करते हैं।

दो दशक से जारी रनों की ‘भूख’
भारत के पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा ने कुछ साल पहले के अपने ऑस्ट्रेलियाई दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि, ‘भारतीय टीम के लिए टेस्ट में ओपनिंग करते हुए मैं 35-40 रन बना रहा था। सभी मेरी तारीफ कर रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ सचिन तेंदुलकर भी 30-40 रन बना रहे थे, लेकिन मीडिया में उनकी खराब फार्म पर आलोचनाएं हो रहीं थी। मैं यह सोच रहा था कि मैं भी उतने ही रन बना रहा हूं, जितने कि सचिन, लेकिन मुझे प्रशंसा मिल रही है और सचिन को आलोचना। हम दोनों के बीच क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों का यह एक बड़ा फर्क था।’

बीस साल से बीसियों विश्व रिकॉर्ड स्थापित करते हए क्रिकेट में एक के बाद एक धमाके करते रहना उनकी आदत में शुमार हो चुका है। 36 की उम्र में वह इंटरनेशनल यूथ आइकॉन बने हुए हैं। मैदान के अंदर और बाहर उनके जैसा खिलाड़ी दूसरा नहीं है। पहले मैच में उनकी प्रतिभा देखने के बाद से देशवासियों ने उनके कंधों पर उम्मीदों का पहाड़ लाद दिया था, जो समय बीतने के साथ बढ़ता ही चला गया। इस बोझ को दो दशक तक उसी उत्साह से उठाते हुए हर बार क्रीज पर उतरना आसान नहीं है।

उनके खाते में टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में सबसे ज्यादा शतक, सबसे ज्यादा रन हैं। वह तीस हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन वह बना चुके हैं। लेकिन उनकी रनों की भूख शांत नहीं हो रही है। वह रनों का अंबार लगाते हुए भारतीय टीम को जिताना चाहते हैं। उन्हें हार पसंद नहीं है। बेटे अर्जुन के साथ आंगन में खेलते हुए भी वह हारना नहीं चाहते।

टेस्ट में आक्रामक बल्लेबाज
भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए गौतम गंभीर ने पूरी गंभीरता से प्रयास किए। घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाया और बड़ी बात यह कि इस फार्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कायम रखा। सहवाग के साथ टेस्ट उनकी ओपनिंग जोड़ी गजब ढा रही है। दोनों ही आक्रामक बल्लेबाजों के होने से गेंदबाजों के लिए खासी मुसीबत हो जाती है। उनका आत्मविश्वास इतना गजब का है कि वह किसी भी तेज गेंदबाज पर वॉक करते हुए शाट खेलने में नहीं हिचकिचाते। उनके इस अंदाज को घरेलू क्रिकेट में विशेषकर खब्बू बल्लेबाज खूब अपना रहे हैं। हालांकि गंभीर वॉक करते हुए शाट खेलने को सही न मानते हुए कहते हैं, ‘मैं जब तक सफल हो रहा हूं, तब तक ऐसा कर रहा हूं। वैसे यह करना सही नहीं है।’ वह इस समय आईसीसी के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज हैं और विश्व टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 बने हुए हैं।

दूध-दही खाकर छक्के छुड़ाते वीरू
दक्षिण अफ्रीका में आईपीएल के सीजन-टू की बात है, मैं केपटाउन से डरबन की जिस फ्लाइट में था, दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के तमाम सितारों के साथ विरेन्दर सहवाग उनकी पत्नी आरती और बेटा भी उसी में थे। मेरे साथ की दो सीटों पर दस-बारह साल के दो दक्षिण अफ्रीकी स्कूली बच्चे बैठे थे। वक्त बिताने के लिए मैंने उनसे पूछा कि क्या आप क्रिकेट में रुचि रखते हो? जवाब मिला, हां। मैंने दाईं तरफ एक सीट पीछे बैठे सहवाग की तरफ इशारा करते हुए पूछा, क्या भारत के इस नामी खिलाड़ी को पहचानते हो? दोनों बच्चों ने मुड़कर सीटों पर घुटने के बल खड़े होकर देखा और तपाक से कहा, ‘नहीं, ये कौन है?’ यह बताने पर कि ये विरेन्दर सहवाग हैं, बच्चे बोले, ‘यह नाम पहले नहीं सुना है। दरअसल, हम प्रोटीज खिलाड़ियों जैसे हर्शल गिब्स, हैंसी क्रोनिए, जॉक कैलिस को ही जानते हैं। हमें क्रिकेट से ज्यादा रग्बी पसंद है।’

अगर भारतीय बच्चों की बात करें तो सचिन तेंदुलकर ने बताया कि, ‘मेरा बच्चा मुझसे पूछता है कि आप सहवाग की तरह से छक्के क्यों नहीं मारते?’ सहवाग ने बल्लेबाजी के मायने ही बदल कर रख दिए हैं, भले ही देश के लाखों माँ-बाप अपने बच्चे को सचिन तेंदुलकर बनना चाहते हों, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि हजारों बच्चे ऐसे भी हैं जो सहवाग बनने का सपना देखते हैं। 31 साल के सहवाग परफेक्ट यूथ आइकॉन बने हुए हैं। दूध-दही और मक्खन खाकर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले बल्लेबाज हैं। भले ही उन पर अच्छी तकनीक न होने के आरोप लगें, लेकिन उभरते बल्लेबाज उनकी तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए चौके-छक्के ठोकने का अभ्यास करते हैं।

अभी तक सिखाया यह जाता था कि खराब गेंदों पर कैसे शॉट मारने हैं। लेकिन सहवाग ने नई राह खोली है कि कैसे अच्छी गेंदों को बाउंड्री के पार पहुंचाना है। सहवाग की थ्योरी औरों से अलग है। चयनकर्ता और कप्तान भी अब सहवाग जैसे खिलाड़ी चाहते हैं, जो तेजी से रन बनाकर टीम को जीत की राह पर डाल सकें। सहवाग टेस्ट हो, या वनडे या 20-20 मुकाबले सभी में एक ही शैली ‘विस्फोटक’ में खेलते हैं।

सहवाग ने जब पहली बार टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में तिहरा शतक बनाया था तो एक समारोह में तब के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने बड़े गर्व के साथ कहा था कि, ‘छक्का मारकर तिहरा शतक पूरा करने का काम मेरी बिरादरी का कोई जाट ही कर सकता है।’ सहवाग की वजह से ही पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली की रणजी से लेकर दूसरी तमाम जूनियर टीमों में जाट खिलाड़ियों की भरमार हुई है। सहवाग ने देश के गरीब और पिछड़े परिवारों में यह भरोसा जताने का काम किया कि सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे सितारों के देश में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

सहवाग के नाम टेस्ट में दो तिहरे शतक हैं और तीसरा तिहरा शतक बनाने से वह महज 7 रन से चूक गए, लेकिन फिर भी कोई गम नहीं। सहवाग ने क्रिकेटरों को नई सोच दी है। अब बड़ी पारियां खेलने के लिए बल्लेबाज गावस्कर के अंदाज में टुक-टुक करने पर यकीन नहीं करते। वे तो मैदान में उतरते ही सहवाग के अंदाज में विस्फोट करना चाहते हैं। अब 90 पर पहुंचने के बाद बल्लेबाज संभलने के बजाए और आक्रामक होने लगे हैं।

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  • Web Title:टीम इंडिया टेस्ट में नंबर वन, अब वनडे की बारी
पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
इंग्लैंड284/8(50.0)
vs
न्यूजीलैंड287/7(49.2)
न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 3 विकटों से हराया
Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
इंग्लैंड284/8(50.0)
vs
न्यूजीलैंड287/7(49.2)
न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 3 विकटों से हराया
Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
दूसरा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
न्यूजीलैंड
vs
इंग्लैंड
बे ओवल, माउंट मैंगनुई
Wed, 28 Feb 2018 06:30 AM IST