DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार

डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को डीडीए फ्लैट आवंटन घोटाले के कथित सरगना की जमानत याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं तथा वह रिहा होने पर मामले में गवाहों पर असर डाल सकता है।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अमित बंसल ने आरोपी लक्ष्मी नारायण मीणा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसे दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 21 जनवरी को गिरफ्तार किया था। अदालत ने कहा कि आरोपी मीणा को मामले में अपराध से जोड़ने के लिए ऑन रिकार्ड काफी सामग्री है और जैसी कि दलील दी गयी है कि वह पूरी साजिश का मुख्य सरगना दिखाई देता है।

अदालत के मुताबिक, अपराध की गंभीरता, आरोप की प्रकृति और मामले के तथ्यों को देखते हुए आरोपी को यदि जमानत मिलती है तो वह झुंझनू, राजस्थान के निर्दोष सरकारी गवाहों को धमकाने में या उन्हें प्रभावित करने में अपनी आजादी का दुरुपयोग कर सकता है।
   
झुंझनू के नागरिक मीणा ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वह भूगर्भशास्त्र में स्नातकोत्तर है और पिछले 15 साल से सामाजिक कार्यकर्ता रहा है। उसने दावा किया कि वह केवल फ्लैट आवंटन के लिए डीडीए आवासीय योजनाओं के फॉर्म भरवाने में मीणा समुदाय के सदस्यों की मदद की कोशिश कर रहा था।

अभियोजन पक्ष ने यह दलील देते हुए मीणा की जमानत याचिका का विरोध किया कि उसने पैन आवेदन फार्मों पर मीणा समुदाय के 400 लोगों के दस्तखत लिये थे और उन्हें सह आरोपी को दे दिया था, जिसने उनके हवाले से फॉर्म भरकर फ्लैट आवंटित कराने का भरोसा दिलाया था।
   
डीडीए आवासीय योजना, 2008 उस समय विवादों में आ गयी थी, जब यह बात सामने आयी कि डीडीए के एक पूर्व अधिकारी और कुछ अन्य लोगों ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आरक्षित कुछ फ्लैटों के आवंटन पाने में सफलता हासिल की। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार