DA Image
29 सितम्बर, 2020|1:27|IST

अगली स्टोरी

डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार

डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को डीडीए फ्लैट आवंटन घोटाले के कथित सरगना की जमानत याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं तथा वह रिहा होने पर मामले में गवाहों पर असर डाल सकता है।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अमित बंसल ने आरोपी लक्ष्मी नारायण मीणा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसे दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 21 जनवरी को गिरफ्तार किया था। अदालत ने कहा कि आरोपी मीणा को मामले में अपराध से जोड़ने के लिए ऑन रिकार्ड काफी सामग्री है और जैसी कि दलील दी गयी है कि वह पूरी साजिश का मुख्य सरगना दिखाई देता है।

अदालत के मुताबिक, अपराध की गंभीरता, आरोप की प्रकृति और मामले के तथ्यों को देखते हुए आरोपी को यदि जमानत मिलती है तो वह झुंझनू, राजस्थान के निर्दोष सरकारी गवाहों को धमकाने में या उन्हें प्रभावित करने में अपनी आजादी का दुरुपयोग कर सकता है।
   
झुंझनू के नागरिक मीणा ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वह भूगर्भशास्त्र में स्नातकोत्तर है और पिछले 15 साल से सामाजिक कार्यकर्ता रहा है। उसने दावा किया कि वह केवल फ्लैट आवंटन के लिए डीडीए आवासीय योजनाओं के फॉर्म भरवाने में मीणा समुदाय के सदस्यों की मदद की कोशिश कर रहा था।

अभियोजन पक्ष ने यह दलील देते हुए मीणा की जमानत याचिका का विरोध किया कि उसने पैन आवेदन फार्मों पर मीणा समुदाय के 400 लोगों के दस्तखत लिये थे और उन्हें सह आरोपी को दे दिया था, जिसने उनके हवाले से फॉर्म भरकर फ्लैट आवंटित कराने का भरोसा दिलाया था।
   
डीडीए आवासीय योजना, 2008 उस समय विवादों में आ गयी थी, जब यह बात सामने आयी कि डीडीए के एक पूर्व अधिकारी और कुछ अन्य लोगों ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए आरक्षित कुछ फ्लैटों के आवंटन पाने में सफलता हासिल की। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:डीडीए घोटाले के सरगना की जमानत से अदालत का इनकार