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मच्छर मारने पर 25 लाख खर्च होंगे!

पटना नगर निगम शहरवासियों का कितना ख्याल रखता है इसका पता विभाग की कार्यप्रणाली से ही दिख जाता है। मशीन रहे या नहीं लेकिन मच्छरों को भगाने के लिए कार्यक्रम जरूर बनाए जाते हैं। भले ही कार्यक्रम निगम की फाइलों से बाहर नहीं निकले। निगम की कागजातों में अगले साल फॉिगग पर 25 लाख खर्च करने की योजना है। निगम प्रशासन हर दिन फॉिगग करने का दावा करता है लेकिन सच्चाई इससे इतर है। मच्छर मारने का अभियान जमीन पर कम कागज पर अधिक तेजी से दौड़ता है। गिनाने के लिए तो निगम के पास फॉिगग मशीनें15, मिनी फॉिगग मशीन 10, बड़ा तीन और वाटर टाइप दो मशीनें हैं।ड्ढr ड्ढr इनमें मात्र चार मशीनें चालू हालत में हैं। एक बड़ा व तीन छोटा। बाकी सब कबाड़ हैं। इन मशीनों से सिर्फ वीआईपी इलाकों में फॉिगग करायी जाती है। मोहल्लों में मच्छर भगाने के लिए दवा का छिड़काव हुए तो एक जमाना गुजर गया है। हालांकि निगम के कागजी आंकड़े पर नजर डालें तो पिछले वित्तीय वर्ष में फॉिगग पर तीन लाख 82 हाार रुपए खर्च किये गये। वहीं चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम छमाही में एक लाख 74 हाार रुपए खर्च हुए हैं। निगम प्रशासन बोर्ड की बैठक के दौरान यह स्वीकार कर चुका है बिना ट्रैक्टर की मशीन कहीं भी नहीं जा सकती हैं। ऐसे में गलियों और कम चौड़ी सड॥कों पर फॉिगग कराना संभव नहीं होता है।ड्ढr ड्ढr हालांकि इस समस्या से निपटने के लिए सभी वार्डो में दो-दो पोर्टेबल स्प्रे मशीनें आठ महीने पहले दी गईं लेकिन दवा अब तक मिली। वार्डो में दवा कब तक उपलब्ध होगी इसके बारे में कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर गर्मी की शुरुआत होने के साथ ही मच्छरों का आतंक भी बढ़ गया है। भूल से भी शाम को अगर घर की खिड़की खुली रह जाए तो घर में मच्छरों की फौज पहुंच जाती है।ं

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