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सफल नहीं हो रही आवारा कुत्तों की बर्थ कंट्रोल योजना

आवारा कुत्तों की तादात पर अंकुश लगाने के लिए बर्थ कंट्रोल की योजना मूर्त रूप नहीं ले पा रही है। इसके चलते कुत्ते के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अस्पताल में आ रहे मरीजों की तादात इसका प्रमाण बनी हैं।
देश में चल रहे एनीमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के तहत सरोवर नगरी में भी आवारा कुत्तों का बंध्याकरण का प्रस्ताव है। पिछले एक साल से इस मामले में चल रहे प्रयास अभी धरातल में नहीं आ सके हैं। अनुमान के अनुसार नगर में दो हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं।


इधर कुत्ते के काटने की घटनाओं में अधिकांश मामले स्ट्रीट डॉग के ही बताए जा रहे हैं। बीडी पांडे जिला अस्पताल में 15 जनवरी से 15 दिसंबर तक 559 रेबीज के इंजेक्शन लगा चुके लोगों में इनकी अधिकता है। इस माह का आंकड़ा 45 पहुंच गया है। पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी का कहना है कि पीपुल फॉर एनीमल संस्था से इस योजना के लिए प्रस्ताव मिला है।इस स्वयंसेवी संस्था से पहले अनुबंध हो चुका है। शीघ्र ही इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। श्री जोशी का कहना है कि पालिका इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

फोकस

आसान नहीं है बंध्याकरण
 कुत्तों का बंध्याकरण सरल काम नहीं है। पशु चिकित्सक डा.योगेश भारद्वाज के अनुसार फिमेल कुत्ते के आपरेशन में अधिक सावधानी की जरूरत होती है। इसमें यूटरस व ओवरी को बाहर निकाला जाता है। आपरेशन के बाद इन्हें एक सप्ताह तक निगरानी में रखा जाता है। 

 

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