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खाद्य मुद्रास्फीति 19.95 फीसदी हुई, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

खाद्य मुद्रास्फीति 19.95 फीसदी हुई, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

महंगी सब्जियां, दाल, दूध, गेहूं और चावल के कारण खाद्य मुद्रास्फीति एक दशक के उच्चतम स्तर 19.95 फीसदी पर पहुंच गई। अर्थशास्त्रियों के अनुसार कीमतों पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है।

वार्षिक आधार पर आलू की कीमत 136 फीसदी बढ़ी जबकि दालें 40 फीसदी महंगी हुई और प्याज की कीमत 15.4 फीसदी बढ़ी।

जिन अन्य खाद्य पदार्थों में तेजी आई है, उनमें गेहूं 14 फीसदी, दूध 13.6 फीसदी, चावल 12.7 फीसदी और फल 11 फीसदी शामिल हैं। इस साल देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे और बाढ़ के कारण अनाज उत्पादन में कमी के मद्देनजर आपूर्ति घटने की वजह से भी खाद्य कीमतों में तेजी आई।

इधर, व्यापक थोक मूल्य मुद्रास्फीति नवंबर के दौरान बढ़कर 4.78 फीसदी हो गई जो अक्टूबर में 1.34 फीसदी थी। इस आंकड़े में खाद्य और ईंधन उत्पादों के अलावा विनिर्मित उत्पाद भी शामिल होते हैं।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने इस सप्ताह कहा था कि मार्च 2010 के अंत तक मुद्रास्फीति करीब सात फीसदी हो सकती है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रहे रंगराजन के अनुसार हमें दिसंबर में कीमतों की गतिविधियों को देखना होगा। आरबीआई द्वारा इस संबंध में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। इन कदमों से मुद्रास्फीति में नरमी आ सकती है।
रिजर्व बैंक 29 जनवरी को मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा करने वाला है। आरबीआई ने इससे पहले साल के अंत तक मुद्रास्फीति पांच फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया था लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया गया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी कहा कि मुद्रास्फीति में वृद्धि चिंता का विषय है।

खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर के अंतिम सप्ताह में 19.05 फीसदी थी। साप्ताहिक आधार पर उड़द और मसालों की कीमतों में तीन फीसदी की वृद्धि हुई जबकि दूध दो फीसदी महंगा हुआ। इधर, मक्का, जौ, सूअर के मांस, मसूर और गेहूं में एक़-एक फीसदी की वृद्धि हुई।

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