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4 जून, 2020|1:47|IST

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दो टूक (17 दिसंबर, 2009)

एक शख्स से दिन-दहाड़े डेढ़ करोड़ की रकम लूट ली जाती है और कोई सुराग नहीं लगता। दिल्ली में सरेराह लुट जाना अब जैसे मामूली बात है।

पौने दो करोड़ की आबादी वाली राजधानी के सत्तर हजार पुलिसकर्मियों में से करीब एक चौथाई वीआईपी सुरक्षा में लगे हैं। अब इस शहर में लुटेरों का बच निकलना नहीं बल्कि लुटेरों से बच निकलना ही बड़ी खबर है।

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  • Web Title:दो टूक (17 दिसंबर, 2009)