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युवावस्था में निवेश

अमूमन युवावस्था में लोग निवेश और सेविंग दोनों पक्षों पर ध्यान नहीं देते। यह उनकी नजर में समय जाया करने वाली बात होती है, लेकिन समय रहते ही ये तय कर लिया जाना चाहिए कि आपके द्वारा किया गया निवेश और सेविंग भविष्य में किस तरह आपकी जरूरतों को पूरा करने में सहायक होता है।

लक्ष्यों का निर्धारण : जिंदगी में किसी भी चीज को हासिल करने के लिए जरूरी है कि पहले आप लक्ष्यों का निर्धारण कर लें। यही बात फाइनेंस पर भी पूरी तरह लागू होती है। निवेश करते समय प्रमुखता से आपको दो बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है। पहली पोर्टफोलियो और दूसरी आपकी जोखिम लेने की क्षमता। साथ ही आपको ये भी पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि आप सेविंग क्यों कर रहे हैं। 

आपको ये जानकारी हो कि कितनी अवधि के दौरान आपकी किस तरह की जरूरतें होगी। उदाहरण के लिए अगर आप यह ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं कि अमुक समय के भीतर मुझे एक वाहन खरीदना है तो यह अल्पावधि का निवेश होगा और अगर आप घर, मकान को ध्यान में रखकर निवेश कर रहे हैं तो यह निवेश दीर्घावधि के लिए होगा। ऐसे में आपकी प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए और इसके लिए सबसे पहला चरण है पोर्टफोलियो का निर्माण।

जोखिम : एक निवेशक के लिहाज से सबसे प्रमुख बात ये है कि आपको ये जानकारी हो कि आपकी जोखिम लेने की क्षमता, निवेश के प्रकार से पूरी तरह मेल खाती हो। आप निवेश सलाहकार या रिस्क एनालाइजर टूल का सहारा ले सकते हैं। एक युवा निवेशक होने के नाते आपको इस मामले में अन्य लोगों से बढ़त है।

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