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दो टूक (16 दिसंबर, 2009)

दिल्ली की सड़कों की वाहन धारण क्षमता की सीमा है लेकिन दिल्ली वालों की नहीं। हवा और ट्रैफिक का बुरा हाल है लेकिन गाड़ियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में दो से अधिक वाहन रखने पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव स्वागत योग्य है।

एक ओर जलवायु परिवर्तन पर चिंता के बादल उमड़ रहे हैं लेकिन इसे अभिजात जीवनशैली से जोड़ने की कोशिशें नहीं हो रही हैं। आखिर संपन्नता की भी तो कोई सीमा होगी? प्रदूषण घटाने की विश्वव्यापी कोशिशों से हमारे वाहनों का भी रिश्ता जोड़ना होगा। चूंकि अपने देश में स्व-अनुशासन का चलन कम है, इसलिए कानून या टैक्स के डंडे के बिना काम नहीं चलता। उम्मीद कीजिए कि भारी टैक्स आंख मूंद कर गाड़ियां खरीदने वालों की आंखें खोलेगा।

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  • Web Title:दो टूक (16 दिसंबर, 2009)