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बढ़ती कीमतों से जनता हुई बेहाल

सस्ता हॉम लोन, सस्ता कार लोन और सस्ती टेलीफोन की दरें। आज के समय में अगर कुछ सस्ता है तो शायद बस ये सभी चीजें ही। कुछ सस्ता नहीं है तो वो है आम आदमी का पेट भरने के लिए रोटी, दाल, बच्चों का दूध। महंगाई आम आदमी की कमर तो पहले ही तोड़ चुकी है अब तो लगता है कि उसकी गर्दन मरोड़ कर ही दम लेगी और ये सब चुपचाप दर्शक की तरह देख रही है सरकार।
मनोज शयकवार, नई दिल्ली

सोना हुआ महंगा 
सोना वायदा बाजार व सटोरियों की कड़ी पकड़ के चलते दिन-प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। सोने की महंगाई से सर्राफा बाजारों में घरेलू कामकाज में गिरावट आयी है, वहीं समाज का कमजोर व मध्यमवर्गीय परिवार सोने की तेजी से शादी व अन्य कामकाज में खरीददारी भी नहीं कर पा रहा है। सट्टा प्रवृत्ति के चलते सोना ही नहीं अन्य चीजें भी महंगी हो रही हैं। सरकार इस पर अंकुश लगाये।
दिनेश गुप्ता, पिलखुवा (उ. प्र.)

महंगी सब्जी, सस्ती जान
सरकार कहती है महंगाई रोकना हमारे हाथ में नहीं है। आम जनता ये पूछ रही है कि जब चुनाव आते हैं तो क्यों घट जाती हैं सब्जी, दालों, पानी और बिजली की कीमतें और चुनाव जाते ही महंगी कर दी जाती है। आम इंसान के खाने की थाली और बदल डाली हमारी दैनिक दिनचर्या सारी। ऐसे बहुत से सवाल हैं पर जवाब नहीं कोई, आखिर कब मिलेगा जवाब? बेराजगारी के बोझ ने हम सबकी कमर तोड़ कर रख दी है।
माधवी चन्द्रा, भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली

सुपर बाजार फिर खोले जायें
कई वर्षो से दिल्ली के सुपर बाजार बन्द पड़े हैं। सरकार को चाहिए कि बन्द सुपर बाजार फिर खोलें, ताकि महंगाई के इस दौर में लोगों को सस्ता सामान उपलब्ध हो सके। इसके अलावा सुपर बाजार बंद होने से जो लोग बेरोजगार हो गए थे, उन्हें भी फिर से काम मिल जाएगा। 
श्याम सुन्दर, तिमारपुर, दिल्ली

फर्जी कर्मचारी
दिल्ली नगर निगम में 22853 कर्मचारी फर्जी पाये गये हैं, जो हर महीने 17 करोड़ रुपये का वेतन ले रहे थे। बहुत मुमकिन है अन्य सरकारी सेवाओं में भी ऐसा ही हो। क्या सरकारें इस तरफ भी ध्यान देंगी।
सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

जल बिन जीना पड़ेगा
कहते हैं कि मनुष्य कुछ दिनों तक बिना भोजन के जीवित रह सकता है, परन्तु बिना जल के तो जीवित रहना असम्भव है। दिल्ली सरकार ने खाद्य पदार्थो, यातायात और अब पानी की कीमतों में भी इज़ाफ़ा करके हर दिल्लीवासी के जेब में आग लगा दी है, ऐसी आग जिसे दिल्ली जल बोर्ड के पानी ने और भड़का दिया। दुनिया भर में जल को जीवन माना जाता है लेकिन दिल्ली में यही जल अब जल, जल न रह कर तेल का काम कर रहा है। ये जगह जगह आग लगा रहा है। क्या अब दिल्लीवासी पानी का घूंट भी सोच-सोचकर और नाप-तौल के पियेंगे।
विकास कुमार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली

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