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बढ़ते वाहनों से दिल्ली जाम की गिरफ्त में

राजधानी में दिनों दिन बढ़ते वाहनो के कारण जाम की विकराल होती समस्या से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली सरकार को दो से अधिक वाहन रखने वालों पर टेक्स बढ़ाने का सुझाव दिया है।


दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश ए. पी. शाह की अध्यक्षता वाली तीन जजों पीठ के समक्ष एक मामले की सुनवाई के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने अदालत को यह जानकारी दी। ट्रैफिक पुलिस के वकील विकास पावा ने अदालत को बताया कि राजधानी में यातायात को सुचारु बनाने के लिए सरकार के समक्ष यह सुझाव पेश कि या गया है। पावा ने बताया कि दो या इससे अधिक वाहन रखने वालों पर रोड टेक्स और पार्किग चार्ज में बढोतरी कर अधिक कर वसूलने का सुझाव दिया है। अदालत ने सरकार से इस पर विचार करने को कहा है।


एमसीडी द्वारा रिक्शों के परिचालन को चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित करने के फैसले के  खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पावा ने बताया कि राजधानी में मौजूद कुल 65 लाख निजी वाहनों में 30 प्रतिशत कारें हैं और 62 प्रतिशत दो पहिया वाहन हैं। याचिका में रिक्शों की संख्या 99 हजार तक सीमित करने के  एमसीडी के फैसले को निरस्त करने की मांग की गई है।


याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने एमसीडी द्वारा रिक्शों को ट्रैफिक जाम के लिए दोषी ठहराने की दलील को गलत बताते हुए कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सड़कों पर 92 प्रतिशत मौजूदगी दो पहिया और चार पहिया वाहनों की है। ऐसे में जाम की समस्या के लिए गरीब रिक्शे वालों को क्यों बली का बकरा बनाया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी कर मामले का फैसला सुरक्षित कर लिया।

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