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मिलों की जंग में किसानों की बल्ले-बल्ले

गन्ने की कमी का असर सामने आने लगा है। गन्ने को लेकर चीनी मिलों में प्राइस वार छिड़ गई है। चीनी मिलों के इस शीतयुद्ध में किसानों की बल्ले-बल्ले हो रही है। मुरादाबाद की वीनस शुगर मिल ने फिर से पांच रुपए कुंतल की बढ़ोतरी कर आग को भड़का दिया है। अब जिले की चीनी मिलों पर भी 215-220 रुपए कुंतल का भाव देने का दबाव बन गया है।


गन्ने का रकबा कम होने का असर अभी से दिखाई देने लगा है। किसानों को अपनी ओर खींचने के लिए चीनी मिलों में प्राइस वार शुरू हो गया है। राज्य सरकार का घोषित 165-170 रुपए कुंतल का दाम बहुत पीछे छूट गया है। गन्ना मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के बाद चीनी मिलों ने एक सुर से 190-195 रुपए कुंतल का दाम घोषित किया। इसके बाद भी गन्ना नहीं मिलने पर चीनी मिलों को गन्ने का दाम बढ़ाकर 205-210 रुपए कुंतल करना पड़ा। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। गन्ने की कमी ने चीनी मिलों में एक तरह का शीतयुद्ध छेड़ दिया और गाहे-बगाहे गन्ने के दाम बढ़ने लगे। मुरादाबाद जिले की वीनस शुगर मिल ने किसानों को खुश करने के लिए गन्ने का दाम 210-215 रुपए कुंतल कर दिया। किसानों के तेवर बदलने के बाद मेरठ मंडल की सभी चीनी मिलों को मजबूरी में यह दाम किसानों को देने की घोषणा करनी पड़ी। अब वीनस मिल ने पांच रुपए कुंतल की फिर से बढ़ोतरी कर आग को भड़का दिया है। यह खबर फैलते ही बागपत और मुजफ्फरनगर जिले के किसानों ने चीनी मिलों से 215-220 रुपए कुंतल का दाम मांग लिया। इससे गाजियाबाद की चीनी मिलों पर भी इतना गन्ना मूल्य देने का दबाव बढ़ गया है। किसानों ने भी वीनस मिल का दाम नहीं मिलने पर गन्ने नहीं देने की चेतावनी दी है। गन्ना अधिकारी भी किसानों के कदम पर निगाह रखे हुए हैं। जिला गन्ना अधिकारी मानवेंद्र सिंह का कहना है कि यह सब चीनी मिलों में छिड़ी प्राइस वार का असर है। मंडल की एक भी चीनी मिल अगर यह दाम देती है तो जिले की चीनी मिलों को भी 215-220 रुपए कुंतल का दाम किसानों को देना पड़ेगा। हालात को देखते हुए गन्ने का दाम 250 रुपए कुंतल तक जाने के आसार है।

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