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22 फरवरी, 2020|3:16|IST

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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सबको पता था चर्बी फैक्ट्री का राज

 जिम्मेदार कौन

- छापेमारी को लेकर फिर उठ रहे सवाल
- पहले चुप्पी क्यों साधे थी क्षेत्रीय पुलिस
- क्यों नहीं की जाती वक्त पर छापेमारी

 पुलिस भले अब चर्बी से घी बनाने का खेल कुछ दिन पहले ही शुरू होने की बात कह रही हो मगर यह सच नहीं है। लंबे समय से यह गोरखधंधा हो रहा था, यह सच्चई इलाके के लोगों की जुबान पर है। पुलिस भी यह बात जानती थी मगर जानबूझकर अब तक चुप्पी साधे थी! छापेमारी को लेकर फिर वैसे ही सवाल उठ रहे हैं, जैसी कहानी जिले में दूसरे थानों की पुलिस के साथ दोहराई जाती रही है।


याद होगा, इसी तरह से कोतवाली गाजियाबाद पुलिस ने कुछ माह पहले  चौपुला के पास नकली घी का कारखाना पकड़ा था, जिसमें घी के मशहूर ब्रांड के नाम से माल तैयार हो रहा था। जानकर हैरत होगी, जिस जगह पर फैक्ट्री चल रही थी, वह जगह कोतवाली से आधा किमी भी दूर नहीं है, फिर भी पुलिस आंखें मूंदे थी। चर्चा तो यह तक सामने आई थी कि पुलिसकर्मी वहां आते-जाते भी देखे जाते थे! हापुड़ हो या लोनी,जब भी नकली घी या ऐसा कोई दूसरा गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ, पुलिस खुद सवालों के दायरे में आती दिखाई दी। भोजपुर इलाके में चर्बी से घी बनाने का भंडाफोड़ होने से फिर लोग दहशत में आ गए हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि धंधे में शामिल इस खेल में काफी समय से लिप्त थे।

पुलिसकर्मियों से लोग इसकी शिकायतें भी करते थे मगर कार्रवाई के नाम पर कभी कुछ नहीं हुआ। अब धंधा पकड़ा गया मगर धंधेबाज करोड़ों का खेल कर चुके थे। देखना ये है कि अब अफसर इस धंधे में शामिल असली गुनहगारों के खिलाफ कितना सख्त कानूनी शिकंजा कसवाते हैं, ताकि बुलंदशहर की तरह मिलावटखोर अपनी अंजाम तक पहुंच सकें। पहले इस जिले में मिलावटखोरों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती देखी गई है।

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