अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भलापन क्यों

आमतौर पर ऑफिस में भले कर्मचारी को ‘बेवकूफ’ और ‘बस यूं ही’ समझकर नज़र अंदाज कर दिया जाता है। सवाल ये उठता है कि ऐसी भलमनसाहत से फायदा ही क्या? हमारी राय है कि भला और सहयोगी तो बनें, लेकिन औरों को अपनी सज्जनता का गलत फायदा न उठाने दें। वे अपना सारा काम आप पर लाद देंगे, जिससे न केवल आप पराए बोझ से टूट जाएंगे, बल्कि उनके हिस्से की डांट और उलाहने भी आपको ही खाने पड़ेंगे। पेश हैं, भलाई की वे हदें जिनके पार मुसीबत है।

- दूसरे सहकर्मियों के काम में उनकी मदद करें, लेकिन केवल तभी जब वे वाकई परेशानी में हों। हर बार उनका काम करेंगे, तो सरासर मूर्ख ही कहलाएंगे।

- अगर आपको अपने कड़े परिश्रम के लिए मिली शाबासी दूसरे टीम मेंबर्स के साथ बांटने की आदत है, तो इतना ध्यान रखें कि बॉस आपके योगदान की पूरी अनदेखी न कर दें। इससे आपको विशेष लाभ देने के बजाय बाकी औसत कर्मचारियों की जमात में शुमार कर लिया जाएगा।

- क्या आप अपने टीम मेंबर्स के काम की क्वालिटी को लेकर सजग और चिंतित रहते हैं, और उनके हाथ का काम खुद करने लगते हैं? अगर हां, तो यह भी जान लीजिए कि उन्हें गाइड करना बेशक आपका काम है, लेकिन उनके काम से नाखुश होकर हर बार फिर से सारा काम खुद कर देना नहीं। इससे आप पर बेवजह काम का बोझ और दबाव बढ़ेगा।

- आप अपने सहकर्मी या बॉस को शानदार आइडिया देते हैं और वह इसके बल पर  ऑफिस में वाहवाही लूटकर इतराता फिरता है। यह आपकी बेवकूफी है। ऐसा करके आप अपने प्रमोशन का चांस खो देते हैं।

- सहकर्मियों की भावनाओं का ख्याल रखकर किसी समस्या को सामने न लाना अनावश्यक सज्जनता है। नतीजा ये होगा कि आपको इस समस्या से बार-बार दो-चार होना पड़ेगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भलापन क्यों