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बिना बजट करवा दिया लाखों का काम

लालढांग-चिलरखाल सड़क को सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग ने कार्य तो शुरू करवा दिया है, लेकिन विभाग के पास एक रुपया भी नहीं है।

विभाग करीब 70 लाख से अधिक का कार्य पूरा करवा चुका है। दूसरे हैड का पैसा निकाल कर इस कार्य के लिए ठेकेदार को भी दे दिया है। इसके चलते लोनिवि के दूसरे कार्य भी अधर में लटक गए हैं।

राज्य बनने के बाद से हाईकोर्ट नैनीताल और राजधानी देहरादून के बीच प्रदेश के अपने राजमार्ग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य की सीमा के भीतर देहरादून-हरिद्वार-लालढांग-चिलरखाल-कोटद्वार-रामनगर मार्ग का प्रस्ताव शासन के पास है।

कालागढ़-रामनगर के मध्य कार्बेट नेशनल पार्क आ जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका मार्ग के निर्माण के विरोध दायर की गयी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मार्ग निर्माण की अनुमति नहीं दी। अब इस मार्ग के एक हिस्से को वाया गैंडीखाता-लालढांग-चिलरखाल मार्ग को ठीक कराने की मांग लंबे समय से चली आ रही है।

लालढांग से चिलरखाल तक 13 किमी लंबा भाग लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र में है। जबकि हकीकत यह है कि लालढांग-चिलरखाल मार्ग के डामरीकरण समेत अन्य कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग के पास एक रुपया तक नहीं है।

2006 में लोक निर्माण विभाग को मार्ग निर्माण के लिए एक करोड़ नब्बे लाख चौंतीस हजार रुपये मिले थे, मगर कार्यदायी संस्था लैंसडौन वन प्रभाग होने के कारण लोनिवि ने वह पैसा वन विभाग को दे दिया। वन विभाग तीन साल तक पैसा दबाए रहा और कार्य नहीं किया।

पैसा लैप्स होकर शासन को वापस हो गया। अब मार्ग निर्माण की जिम्मेदारी पुन: लोनिवि को मिली मगर पैसे के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिल सका।

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