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71 के युद्ध को याद कर फड़क उठती हैं भुजाएं

सेना में शामिल उत्तराखंडवासियों का हमेशा ही गौरवशाली इतिहास रहा है। प्रत्येक मोर्चे पर उन्होंने एक विशेष मुकाम हासिल किया है। 1971 के युद्ध में भी प्रदेश के जांबाजों ने अदम्य साहस का परिचय दिया था।

युद्ध में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड के नौ सूरमाओं को महावीर चक्र व 30 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया।  युद्ध में महावीर चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट जनरल आनंद स्वरूप उस समय बांग्लादेश में तैनात थे।

उन्होंने टीम को सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ने के निर्देश दिए थे। मुश्किल हालतों में भी बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए उन्हें तथा उनके कई साथियों को सैन्य सम्मान से नवाजा गया था। देहरादून के सर्वाधिक आठ जांवाजों को महावीर चक्र दिया गया था।

वीर चक्र प्राप्त करने वाले 30 जांबाजों में भी देहरादून के सबसे अधिक जवान थे। इस युद्ध में प्रदेश के 219 जवानों ने शहादत भी दी थी। पिथौरागढ़ जिले के सर्वाधिक 51 जवान शहीद हुए थे। ब्रिगेडियर (अप्रा) केजी बहल कहते हैं कि इस युद्ध में इंजीनियरों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पिछले दिनों मेरठ में 59-इंजीनियर रेजीमेंट ने युद्ध में शहीद कर्नल वात्सा की चांदी की मूर्ति भी लगाई है। उनके मुताबिक 1971 का युद्ध भारतीय सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। इससे सेना की मजबूती पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित हुई।

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