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आलू की फसल में जब यह हाल तो गेहूँ में क्या होगा

आलू फसल में यूरिया की अचानक बढ़ती माँग से कृषि विभाग का सारा गणित फेल हो गया है। हालत यह है कि आलू बेल्ट में एकदम से यूरिया की बढ़ी माँग और उसके सापेक्ष उपलब्ध स्टाक की स्थिति ने प्रदेश के बड़े-बड़े अफसरों की नींद उड़ा दी है।

और तो और दो दिन पूर्व तक उर्वरक के मसले पर पानी पी-पीकर केन्द्र को कोसने वाले अफसर और मंत्री तक अब केन्द्र के सामने नतमस्तक नजर आ रहे हैं।

इसी के तहत राज्य सरकार ने  प्रदेश में यूरिया की तत्काल व्यवस्था के लिए केन्द्र को त्रहिमाम पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि अगर माँग के अनुरूप यूरिया की व्यवस्था नहीं हुई तो कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती है।

केन्द्र को भेजे पत्र में कहा गया है कि प्रदेश को इस माह के लिए सात लाख टन यूरिया का आवंटन हुआ है लेकिन अब तक मात्र दो लाख टन यूरिया ही मिल पाया है।

चूंकी आलू व गेहूँ को इस समय इस उर्वरक की बेहद जरूरत है लिहाजा यूरिया की आवंटित मात्र तत्काल प्रदेश को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक) पीके पाण्डेय भी स्वीकार करते हैं कि अगले 15 दिनों में हमें पाँच लाख टन यूरिया की जरूरत है लेकिन पखवारे भर में इतनी अधिक मात्र का व्यवस्था कैसे होगी

इसका जवाब उनके पास नहीं है। इस बात की तस्दीक कृषि निदेशक राजित राम वर्मा भी करते हैं। उनका कहना है कि अगर तत्काल व्यवस्था नहीं हुई तो स्थिति गड़बड़ हो सकती है।

हालांकि उनका कहना है कि अभी यूरिया की कोई बड़ी समस्या नहीं है। यह अलग बात है कि आलू उत्पादन वाले क्षेत्रों विशेषकर कानपुर, इटावा, फरुखाबाद, एटा, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़ इत्यादि में यूरिया की कालाबाजारी शुरू हो गई है।

सूत्र बताते है कि इन जिलों के बाजारों में या तो यूरिया है नहीं या फिर है तो वह ब्लैक में किसानों मिल रही है। अर्थात यूरिया की 252.50 रु. का बैग 300-310 रु. में बिक रही है।

जानकारों के अनुसार पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब यूरिया की माँग शुरू हो गई है लेकिन आलू वाले क्षेत्रों में इसकी माँग अपेक्षाकृत ज्यादा है क्योंकि आलू की फसल को तत्काल यूरिया की जरूरत है।

विदित हो कि हिन्दुस्तान ने चार दिसम्बर के अंक में उर्वरक मंत्रलय के फर्टिलाइजर मॉनेटरिंग सिस्टम के दस्तावेजों के आधार पर यह खबर प्रकाशित की थी कि 15 दिसम्बर से 15 फरवरी के बीच जब यूरिया का पीक सीजन होगा तब प्रदेश को करीब 23 लाख टन युरिया की जरूरत होगी जिसकी व्यवस्था राज्य सरकार के डेढ़ी खीर है।

उक्त खबर में बकायदा तर्क दिया गया था कि एक़ माह में दस लाख टन यूरिया लाने का मतलब है कि कम से कम 400 रैक की व्यवस्था करना। अर्थात 13 से 14 रैक यूरिया बिना नागा प्रतिदिन आए तभी संकट समाप्त हो सकती है जबकि एक दिन में अधिकतम तीन से चार रैक ही लोड हो पाते हैं। (एक रैक में ढ़ाई हजार टन माल आता है)।

जानकारों का कहना है कि यह कतई सम्भव नहीं है कि रेलवे रोज रैक की व्यवस्था ही कर दे। ऐसे में इतने कम समय में लाखों टन यूरिया की व्यवस्था कैसे होगी इसका सही जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।

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  • Web Title:यूरिया की कमी से अधिकारियों की नींद उड़ी