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जगन ने किया तेलंगाना का विरोध, सकते में कांग्रेस

जगन ने किया तेलंगाना का विरोध, सकते में कांग्रेस

प्रस्तावित पृथक तेलंगाना के विरोध में आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में जारी आंदोलनों के बीच प्रदेश कांग्रेस में दरार खुलकर सामने आ गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार पर इस मुद्दे को जटिल बनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है।

मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस के लिए उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के बेटे और सांसद वाईएस जगमोहन रेड्डी के नेतृत्व में कुछ सांसदों ने पृथक तेलंगाना का विरोध कर रहे तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के सदस्यों के साथ हाथ मिला लिया। इसको लेकर पार्टी के सांसदों के बीच ही तकरार हो गई और यहां तक कि तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेसी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से रेड्डी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर डाली।

उधर, बंद की वजह से आंध्र प्रदेश के आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। इन क्षेत्रों में छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पें भी हुईं, जिसमें कम से कम पांच लोग घायल हो गए। रैली, धरना, बैठक, भूख हड़ताल के साथ-साथ सड़क और रेल मार्ग को जाम किए जाने के कारण इन क्षेत्रों में लगातार पांचवें दिन भी जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।

इधर, मंगलवार को बंटवारे के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वाईएस राजशेखर रेड्डी के भाई वाईएस विवेकानंद रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कांग्रेस सांसद एल राजगोपाल ने विजयवाड़ा में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। एक दिन पहले ही उनको आंदोलन शुरू करने के कारण दो बार गिरफ्तार किया गया था।

प्रदेश कांग्रेस इकाई में दरार :
पृथक तेलंगाना के गठन के मुद्दे पर लोकसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के सांसदों के बीच नोंक-झोंक के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सदन में शून्यकाल के दौरान तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) को तेलंगाना का मसला को उठाने की अनुमति दी गई थी। तेदेपा के सांसद पृथक तेलंगाना का विरोध करते हुए अध्यक्ष मीरा कुमार के आसन के सामने इकट्ठा हो गए।

इसी बीच आंध्र प्रदेश के कई कांग्रेसी सांसद भी उनके साथ खड़े हो गए। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वाई एस राजशेखर रेड्डी के बेटे व सांसद वाई एस जगनमोहन रेड्डी भी शामिल थे। यहां तक कि जगनमोहन रेड्डी को पृथक तेलंगाना के विरोध में टीडीपी के सांसदों के साथ हाथ मिलाते देखा गया। वह अपने हाथ में 'वी वांट यूनाइटेड एपी' लिखी हुई तख्ती लिए हुए थे।

इसे देखते हुए आंध्र क्षेत्र के सांसद के एन राव के नेतृत्व में कांग्रेसी सांसदों ने भी अपनी आवाज उठाने की कोशिश की और अध्यक्ष के आसन की ओर बढ़ने लगे। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए उनसे अपने स्थान पर जाने को कहा। इसी बीच तेलंगाना के समर्थन में सांसद एम. जगन्नाथ के नेतृत्व में भी कुछ कांग्रेस सांसदों ने अपनी आवाज उठाने की कोशिश की। इसको लेकर कांग्रेस सांसदों के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए दोपहर 12.30 बजे तक स्थगित कर दी।

स्वर्णिम तेलंगाना चाहते हैं जगमोहन रेड्डी:
मंगलवार को संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में वाई. एस. जगमोहन रेड्डी ने कहा है कि पृथक तेलंगाना के विरोध का उनका उद्देश्य स्वर्णिम तेलंगाना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एकीकृत आंध्र प्रदेश के पक्षधर हैं और वह यह नहीं चाहते थे कि इस मामले में अकेले विपक्षी सांसद 'विजेता' बन जाएं। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि 'स्वर्णिम तेलंगाना' से उनका क्या आशय है। रेड्डी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि हर कोई भाई-बहन की तरह रहें। वे सभी भाई-बहन हैं। मैं अपने तेलंगाना के किसी भी भाई-बहन को खोना नहीं चाहता।

रेड्डी के खिलाफ कार्रवाई की मांग:
लोकसभा में जगमोहन रेड्डी द्वारा टीडीपी के सांसदों के साथ 'हाथ मिलाने' को लेकर तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेसी सांसदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सांसद मधु गौड़ याक्षी और एम. जगन्नाथ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री एके एंटनी से मुलाकात कर यह मांग की। एंटनी कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष भी हैं।

याक्षी ने कहा कि जगमोहन ने विपक्षी टीडीपी के सांसदों से हाथ मिलाकर पार्टी का अनुशासन तोड़ा है। याक्षी ने कहा कि सदन जगमोहन द्वारा खड़े किए गए नाटक का गवाह है। उन्होंने आरोप लगाया कि जगमोहन तेलंगाना मसले का इस्तेमाल राज्य में कांग्रेस की सरकार गिराने के लिए कर रहे हैं। याक्षी ने आरोप लगाया कि वाईएसआर के निधन के बाद अपने को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के निर्णय से जगमोहन पार्टी नेतृत्व से खुश नहीं हैं।

बंद से बुरी तरह प्रभावित रहा आंध्र और रायलसीमा:
बंद की वजह से आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। इन क्षेत्रों में छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पे भी हुईं, जिसमें कम से कम पांच लोग घायल हो गए। अनंतपुर जिले में श्रीकृष्णदेव आर्य विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पे हुईं, जिसमें दो पुलिसकर्मी सहित कम से कम पांच लोग घायल हो गए।

विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर रहे पुलिसकर्मियों पर छात्रों ने पथराव किया। पृथक तेलंगाना के खिलाफ कुछ छात्र यहां अनशन कर रहे हैं। पुलिस ने कुछ छात्रों को गिरफ्तार भी किया। गत पांच दिनों में रायलसीमा क्षेत्र में आने वाले अनंतपुर जिले में सबसे अधिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विशाखापट्टनम में सोमवार रात पुलिस ने आंध्र विश्वविद्यालय में कई छात्रों को गिरफ्तार किया था।

तेदेपा के विधायकों ने आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में हुई झड़पों के खिलाफ मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। ये सभी पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में मुख्यमंत्री ने तेदेपा विधायकों से मुलाकात की। अनंतपुर में तेदेपा विधायक पी.सुनीता और तीन अन्य विधायकों की भूख हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही।

सरकार ने जटिल किया तेलंगाना मुद्दा: भाजपा
भाजपा ने सरकार पर तेलंगाना मुद्दे पर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए नए राज्य के गठन की रूपरेखा पेश किए जाने की मांग दोहराई है।

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे पर भाजपा के एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश में जो कुछ हो रहा है वह चिंता की बात है। केंद्र सरकार ने मामले को पेचीदा बना दिया है। राज्य में अशांति है, छात्र आंदोलन कर रहे हैं। 130 से अधिक विधायक इस्तीफे की बात कर रहे हैं। विधानसभा की कार्यवाही नहीं चल पा रही है और उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की भावनाओं के साथ खेल रही है। सरकार ने पूरी तरह अपरिपक्वता और गैर जिम्मेदारी दिखाई है। मैं सरकार से चाहता हूं कि वह तेलंगाना मसले पर स्पष्ट रूपरेखा के साथ सामने आए।

आंध्र प्रदेश के निवासी और कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य नायडू ने ऐसी ही मांग पिछले सप्ताह भी की थी। आंध्र प्रदेश के विधायकों और सांसदों से चर्चा किए बिना नए राज्य के गठन को मंजूरी देने के लिए नायडू ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के नेता भड़काऊ भाषण देकर अनशन कर रहे हैं। राज्य कांग्रेस में विभाजन है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि उनसे कोई सलाह नहीं ली गई।

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