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बीपीएड में खाली रह गई सीटें

बीएड और बीपीएड छात्रों को विशिष्ट बीटीसी से आउट करने के फैसले का असर पड़ना शुरू हो गया है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बीपीएड के लिए छात्रों की कमी हो गई है। 12-13 दिसंबर को हुई काउंसलिंग में आधी सीटें खाली रह गई। सभी रैंक के छात्रों को बुलाने के बाद भी सीटें नहीं भरी।


विशिष्ट बीटीसी के चलते बीएड और बीपीएड कॉलेजों की बाढ़ आ गई थी। ये कॉलेज मनमानी दर पर प्रवेश कर रहे थे। गत वर्षो तक विश्वविद्यालय के बीएड और बीपीएड में प्रवेश के लिए एक लाख रुपए तक छात्र खर्च कर रहे थे। अब प्रदेश सरकार ने विशिष्ट बीटीसी से बीएड और बीपीएड को बाहर करने का फैसला लिया तो इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की बची हुई पांच सौ बीपीएड सीटों के लिए काउंसलिंग हुई। काउंसलिंग 12-13 दिसंबर को हुई। काउंसलिंग में सभी रैंक वाले परीक्षार्थी बुलाए गए थे। विश्वविद्यालय को उम्मीद थी कि सभी रैंक वाले छात्रों से सीटें भर जाएंगी, लेकिन काउंसलिंग में छात्रों का टोटा साफ दिखाई दिया। काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े डा.वाईएस तोमर ने बताया कि पांच सौ सीटों के लिए काउंसलिंग की गई थी। विश्वविद्यालय की केवल 250 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। करीब ढाई सौ सीटें खाली रह गई हैं। यह विशिष्ट बीटीसी का प्रभाव है। गत वर्षो तक पहले दिन ही सारी सीटें भर जाती थी। इस बार प्रवेश के लिए छात्रों का टोटा था। वहीं बीपीएड कर रहे छात्रों में शंका है। वे लाखों रुपए खर्च कर चुके हैं

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