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कल तक उजाड़,सुबह दिखी घासों की कारपेट

कलेक्ट्रेट के सामने ग्रीन बैल्ट पर रातों-रात हरियाली उग आने के बाद लोग अचंभे में हैं। कल तक जहां कुछ नहीं था वहीं मंगलवार की सुबह हरे घासों की कारपेट बिछी दिखने लगी,पेड़-पौधे भी लगा दिए गए। इससे कयास लगने लगा कि शहर के मध्य से गुजरने वाली हापुड़ रोड पर अब हरियाली ही हरियाली नजर आएगी। दोनों ओर इसी प्रकार हरियाली डवलप की जा रही है,इससे उन सैकड़ों लोंगों को भी सकून महसूस होगा,जो दूरदराज के गांवों से कलेक्ट्रेट या कचहरी आते-जाते रहते हैं और चिड़चिड़े मन से वापस लौट आते हैं। उन्हें न तो कहीं सकू न से बैठने-उठने की जगह मिलती है और नहीं कोई ऐसा नजारा,जिसे देखकर वो अपने को तरोताजा महसूस कर सकें ।


खासकर, कलेक्ट्रेट आने-जाने वालों के लिए यह सुखदायी साबित होगा। जीडीए ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिया है। आदर्श योजना के तहत पहले हापुड़ रोड पर मेरठ रोड तिराहे तक सड़क किनारे ग्रीनबैल्ट को हरा-भरा कर फुटपाथ को सुदृढ़ करने का काम शुरू हुआ,अब कलेक्ट्रेट से हापुड़ चुंगी तक ग्रीनबैल्ट को हरा-भरा करने की बारी है।
बीते कई दिनों से उद्यान विभाग द्वारा ग्रीन बैल्ट पर निकाई-गुडा़ई व समतलीकरण का काम चल रहा था,कल सुबह जहां कुछ नहीं था वहीं मंगलवार की सुबह एक पॉकेट पर हरियाली दिखने लगी। हरे-भरे घासों के बीच दोनों ओर पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं। कारपेट घास की पट्टी ने ग्रीनबैल्ट की रौनक बढ़ा दी। 


 उद्यान अधिकारी गोविंद सिंह ने बताया कि लगभग  चार लाख की लागत आएगी,तब कलेक्ट्रेट से हापुड़ चुंगी तक दोनों तरफ ग्रीनबैल्ट सचमुच हरा भरा दिखेगा। फिलहाल एक पॉकेट को कारपेट की घास लगाकर तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि काफी चौड़ी ग्रीन बैल्ट पर अब भी यूकेलिप्टस के सैकड़ों पौधे खड़े हैं। पूरी हरित पट्टी गंदगी और उजाड़ पड़े है। प्राधिकरण ने इस ग्रीनबैल्ट से यूकेलिप्टस को हटाकर हरियाली लाने का काम कर रहा है। वन विभाग को लिप्टस के पौघे काटने के लिए पत्र भी लिखा गया है। लिप्टस के पेड़ हट जाने के बाद ही ग्रीन बैल्ट को असली रूप दिया जा सकेगा।

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