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कोपेनहेगन में सफलता नहीं, मामला अब राष्ट्र प्रमुखों पर

कोपेनहेगन में सफलता नहीं, मामला अब राष्ट्र प्रमुखों पर

अब कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं, जब दुनिया भर के राष्ट्र प्रमुख कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर चल रहे शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। लेकिन मंगलवार तक की स्थिति यह रही कि किसी कोपेनहेगन समझौते का संकेत नहीं मिल पाया है। इतनी सफलता जरूर मिली है कि यहां जमा हुए 100 से अधिक पर्यावरण मंत्रियों ने सम्मेलन को विफल होने से बचा लिया है।

रात को सरकारी प्रतिनिधियों के बीच बंद कमरे में चली बातचीत के दौरान सम्मेलन की विफलता की एक प्रबल आशंका दिखाई दी थी, क्योंकि धनी देश अपने रुख से चिपके रहे कि वे जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए तब तक कुछ नहीं करेंगे, जब तक उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपनी कार्रवाइयों के अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए राजी नहीं हो जातीं।

बैठक में उपस्थित रहे एक प्रतिनिधि के अनुसार चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने इसे एक बार फिर खारिज कर दिया। प्रतिनिधि ने बताया कि अफ्रीकी देशों के समूह और छोटे द्वीपिय देशों के गठबंधन (एओएसआईएस) ने एक बार फिर बातचीत से बाहर होना चाहा, क्योंकि उनकी चिंताओं को दूर नहीं किया जा रहा था। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि उसके बाद उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने दिन में सम्मेलन को विफल होने से बचा लिया।

प्रतिनिधियों ने कहा कि रमेश और चीन, ब्राजील व दक्षिण अफ्रीका के पर्यावरण मंत्रियों ने अन्य विकासशील देशों के समूहों के साथ एक अलग से बैठक की और उन्हें सम्मेलन में बने रहने तथा बातचीत में हिस्सा लेने को राजी किया। फिर भी बातचीत लगातार उल्टी दिशा की ओर बढ़ती रही। रात को छह नए समझौतों के मसौदे पेश किए गए। यदि उन सभी मसौदों पर विचार करना हो तो इसके लिए महीनों तक बैठक करनी होगी।

अभी तक की स्थिति यह है कि पिछले महीने बीजिंग में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन द्वारा तैयार किए गए बीएएसआईसी मसौदे के ही किसी कोपेनहेगन समझौते के रूप में घोषित किए जाने की अधिकतम संभावना है।

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