DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

84 दंगे में पाँच सिखों की हत्या में सिपाही की आजीवन कारावास की सजा बहाल

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 1984 में हुए दंगों के दौरान थाना बड़ौत (बागपत) में शरण लिये पाँच सिखों की 5 नवम्बर को गोली मारकर हत्या करने वाले सिपाही तिलकराम को सत्र न्यायालय मेरठ द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बहाल रखा है। न्यायालय ने सजा पाए सिपाही तिलक राम द्वारा दाखिल आपराधिक अपील को खारिज कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश तिवारी एवं न्यायमूर्ति एके रूपनवाल की खण्डपीठ ने पारित किया है। इस घटना में सरदार बाल कृष्ण, हरजीत सिंह, करनैल सिंह, योगेन्द्र सिंह बाला एवं गुरजीत सिंह को गोलियाँ लगीं थीं। बाद में उनकी मौत हो गई।

अपीलकत्र्ता सिपाही तिलक राम पर आरोप था कि उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद उसके थाने बड़ौत (बागपत) में शरण लिए छह सिखों पर अंधाधुंध गोलाबारी की थी जिनमें से एक बच गया था एवं पाँच की मृत्यु हो गई थी।

सत्र न्यायालय ने मामले पर सुनवाई के बाद तिलकराम की मानसिक स्थिति को देखते हुए फाँसी के स्थान पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपील में कहा गया था कि उसकी मानसिक हालत उस समय ठीक नहीं थी जिससे यह घटना घटी।

न्यायालय ने कहा कि उस समय इन्दिरा गांधी की हत्या हुई थी जिस कारण उसके मन में नाराजगी थी। उसने मौका देखा कि थाने में उस समय पुलिस अधिकारी थाने में नही हैं, उसने गोलियों की बौछार कर दी जिसमें छह सिख घायल हो गए थे जिनमें से पाँच की मृत्यु बाद में हो गई।

न्यायालय का मानना था कि उसके द्वारा दिया गया यह बयान कि उस पर देवी आती है एवं वह किसी भी समय किसी की हत्या कर सकता है, केवल अपने को मानसिक रोगी दिखाने के लिए था। वह मानसिक रोगी नहीं है। इस आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सिखों की हत्या में सिपाही की आजीवन कारावास