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‘दूसरी धरती’ को खोजने निकली नासा की दूरबीन

धरती जैसे दूसरे ग्रह की तलाश के मकसद से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने फ्लोरिडा के केप केनवरेल से एक अनाम डेल्टा रॉकेट के जरिए एक दूरबीन को शुक्रवार को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। ‘केपलर’ नाम की यह दूरबीन आकाश गंगा के दूसरे छोर पर स्थित में यह टटोलने की कोशिश करेगी कि क्या इन ग्रहों में जीवन की कोई गुंजाइश है। इस दूरबीन का नामकरण सदी के महान खगोलविद जान केपलर के सम्मान में किया गया है। नासा के सहायक प्रशासनिक अधिकारी एड व्हीलर ने बताया कि नासा ने अब तक तीन सौ से अधिक ग्रहों का पता लगाया है, लेकिन उनमें से एक भी हमारी धरती जैसा नहीं है। वैज्ञानिकों की योजना है कि केपलर दूरबीन के जरिए लगभग एक लाख संभवित जगहों पर जिंदगी की पहचान का काम संपन्न किया जाए। केपलर परियोजना के प्रबंधक जिम फैन्सन ने बताया कि इतनी विशालकाय मंदाकिनी में धरती जैसे किसी ग्रह की खोज करना बेहद मुश्किल काम है। मसलन बृहस्पति जैसे विशालकाय ग्रह कार की हेडलाइट में दिखाई पड़ने वाले किसी मच्छर की तरह दिखते हैं। ऐसे में धरती जो कि बृहस्पति से कई गुना छोटी है उसे ढूंढना वाकई कठिन है। इतना ही नहीं इसमे लगने वाला समय भी धैर्य की कड़ी परीक्षा लेगा। नासा को आशा है कि 50 लाख डॉलर वाली यह परियोजना अपने मकसद में सफल होगी। कार्नेगी इंस्टिटूशन ऑफ वाशिंगटन से जुड़े खगोलविद एलन बास ने कहा कि अगर केपलर दूरबीन अपने उद्देश्य में असफल रही तो यह बेहद आश्चर्य में डालने जैसा होगा। उन्होंने कहा वह सोचते हैं कि इसे धरती जैसी एक नहीं बल्कि कई धरती मिल सकती है। इस बीच नासा के प्रबंधकों ने शुक्रवार को अंतरिक्ष यान डिस्कवरी को आगामी बुधवार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन निर्माण के इरादे से भेजने की अनुमति दे दी। इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से छोड़ा जाएगा। यह यान अपने साथ अमेरिका निर्मित सौर ऊर्जा के पैनल ले कर जाएगा।

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