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अंतिम दस ओवरों में बने विजेताः धोनी

अंतिम दस ओवरों में बने विजेताः धोनी

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका पर पहले वनडे में रोमांचक जीत के बाद स्वीकार किया कि उनकी टीम रनों के अंबार वाले इस मैच में अंतिम दस ओवर में विजेता की तरह खेली।

धोनी ने भारत की तीन रन की रोमांचक जीत के बाद कहा कि यह बड़ा मुश्किल होता है जबकि आप 400 से अधिक का स्कोर बनाते हैं और लगभग हार की कगार पर पहुंच जाते हो। पहले 35 ओवर वास्तव में हमने अच्छा खेल नहीं दिखाया लेकिन अंतिम दस-बारह ओवरों में गेंदबाजों, क्षेत्ररक्षकों सभी ने जज्बा दिखाया। इन ओवरों में हम विजेता की तरह खेले।

धोनी ने कहा कि हम यह कह सकते हैं कि विकेट लगातार अच्छा होता जा रहा था और यह भी कह जा सकता है कि (बड़ा स्कोर होने के कारण) हमने ध्यान नहीं दिया लेकिन इसके बाद हमने बहुत अच्छी गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण किया। मैं इस जीत से वास्तव में खुश हूं।

धोनी ने इसके साथ ही कहा कि बल्लेबाजी में अंतिम ओवरों में उनकी टीम और बेहतर खेलती तो स्कोर 450 रन के पार पहुंचता। उन्होंने कहा कि हम 35वें ओवर में 300 रन का स्कोर पार कर लिया था। विकेट लगातार बल्लेबाजी के लिए अच्छा बनता जा रहा था और जिस तरह से हम बल्लेबाजी कर रहे थे उससे हमें 450 रन तक पहुंचना चाहिए था। इस स्कोर तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता।

धोनी ने हालांकि क्षेत्ररक्षण पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के विकेट पर यदि आप कैच नहीं लेते हो तो फिर आप बैकफुट पर चले जाते हो। दिलशान, जयसूर्या, सहवाग जैसे बल्लेबाजों के कैच छोड़ने पर आप परेशानी में पड़ जाओगे।

भारतीय कप्तान ने आशीष नेहरा को अंतिम ओवर सौंपने के बारे में कहा कि उन्होंने यह फैसला करने से पहले अधिक नहीं सोचा और बाएं हाथ के इस गेंदबाज के अनुभव पर विश्वास किया। उन्होंने कहा कि नेहरा ने लगातार पांच ओवर किए थे और इसलिए मुझे यह फैसला करने में मुश्किल नहीं हुई। उसे कुछ रिवर्स स्विंग मिल रही थी और वह अच्छी लाइन व लेंथ से गेंदबाजी कर रहा था। वह अनुभवी है और दबाव की ऐसी परिस्थितियों में यह काफी काम आता है।

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