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स्वास्थ्य देखरेख के लिए डाक्टरों की भारी कमी

स्वास्थ्य सेवाओं पर भारत का खर्च बहुत ही कम है, जबकि स्वास्थ्य देखरेख की 60 प्रतिशत लागत रोगियों द्वारा ही वहन की जाती है और इसके अलावा देश में डाक्टरों की भी भारी कमी है, जिस कारण अधिकांश लोग उचित उपचार से वंचित रह जाते है।
    
ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की देखरेख कर रही प्रसिद्ध दवा कंपनी सनोफी एव्रेटिस इण्डिया के वरिष्ठ डायरेक्टर प्रतीन बेटे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत में बीस हजार से कुछ अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ही लगभग छह लाख गांवों को मुश्किल से अपनी सेवाएं दे पा रहे हैं।
    
प्रतीन बेटे ने बताया कि सनोफी ने ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य देखरेख के व्यवहार की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए दोहरी कार्यनीति की घोषणा की है और कम्पनी ने  प्रयास  नामक संगठन की शुएआत की है, जो पूरे भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में सेवारत डाक्टरों के लिए निर्धारित निरन्तर शिक्षा कार्यक्रम के जरिए निदान और उपचार के बीच की कमी को दूर करेगा। प्रयास के माध्यम से अर्ध शहरी क्षेत्रों के विशेषज्ञ डाक्टर, भारत के छोटे कस्बों और दूर गांवों में कार्यरत पेशेवर डाक्टरों को चिकित्सा क्षेत्र के नवीनतम ज्ञान और निदान से जुड़े अनुभवों को जानकारी देकर अपने सामाजिक सारोकार को पूरा करेंगे। प्रतीन ने बताया कि सनोफी एवेंटिस स्वास्थ्य देखरेख की सेवा सुलभता बढाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के रोगियों को कम कीमत पर बढ़िया दवाइयां उपलब्ध करायेगी।

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