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कहीं डेट... ना बन जाए रेप

कहीं डेट... ना बन जाए रेप

डेट पर जाना युवाओं के लिए आज एक फैशन-सा बन गया है, लेकिन पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएं भी देखने में आई हैं, जिनमें डेट पर गई लड़की के साथ उसके बॉयफ्रैंड ने या फिर उसके पुरुष मित्रों ने रेप कर दिया। पश्चिमी समाज की यह अवधारणा डेट-रेप अब भारत में भी दिखाई देने लगी है। यही नहीं, ‘डेट रेप ड्रग’ भी बाजार में उपलब्ध हैं। डेट रेप से युवा लड़कियां कैसे बच सकती हैं?
 
चौबीस वर्षीया शिल्पा (बदला हुआ नाम) एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। साथ काम करने वाले राहुल के प्रति उसका आकर्षण स्वाभाविक था, लेकिन दोनों के बीच प्रेम जैसी कोई बात नहीं थी। एक दिन नोएडा में ऑफिस की एक पार्टी थी। दोनों साथ ही पार्टी में गए। वहां राहुल ने तो थोड़ी-सी शराब पी, लेकिन शिल्पा ने महज कोल्ड ड्रिंक ही लिया। लेकिन ना जाने क्यों कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद शिल्पा का सिर भारी होने लगा। शुरू में उसे कुछ अंदाजा नहीं हुआ। उसने यही बात राहुल से कही तो राहुल ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है, वह उसे घर तक छोड़ आएगा।

पार्टी से निकलते-निकलते दोनों को रात के ग्यारह बज गए। बाइक पर राहुल शिल्पा से छेड़छाड़ करने लगा। शिल्पा ने उसे रोकना चाहा तो उसने जबरदस्ती करने की कोशिश की। संयोग से वे दोनों सड़क पर थे, इसलिए राहुल चाह कर भी उसके साथ ज्यादा कुछ नहीं कर पाया। लेकिन अगले दिन शिल्पा को समझ में आ गया कि राहुल ने उसकी कोल्ड ड्रिंक में शराब मिला दी थी, ताकि वह नशे में उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ कर सके। शुक्र है शिल्पा किसी तरह बच गई।

बड़े महानगरों में यह एक ट्रैंड-सा बनता जा रहा है। युवा और किशोरियां तक डेट पर जाने के लिए लालायित रहती हैं। आठवें और नवें दशक तक मध्यवर्ग की लड़कियां बॉयफ्रैंड बनाने में बेहद संकोच करती थीं। जिन लड़कियों के बॉयफ्रैंड हुआ भी करते थे, उन्हें मित्रमंडली ही अच्छी नजर से नहीं देखती थी, लेकिन आज सब कुछ बदल गया है। आज कॉलेज गर्ल्स की बात तो छोड़ दीजिए आठवीं, नवीं तक में पढ़ने वाली लड़की भी बॉयफ्रैंड चाहती है। दिलचस्प बात है कि जिन लड़कियों के बॉयफ्रैंड नहीं होते, उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है और उनका मजाक उड़ाया जाता है। लिहाजा जवान होती लड़कियों के लिए बॉयफ्रैंड का होना एक आवश्यक शर्त-सी बनता जा रहा है।

ऐसे में डेटिंग पर और पार्टियों में जाना आम बात हो गयी है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ऐसी अनेक घटनाएं देखने में आई हैं, जिनमें लड़की अपने बॉयफ्रैंड के साथ डेट पर गई और वहां उसके साथ उसके दोस्तों ने मिल कर बलात्कार कर दिया। ताजातरीन मामला टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस की 23 वर्षीया अमेरिकी छात्र का है, जिसे नशीला पदार्थ खिला कर उसी के छह दोस्तों ने उसके साथ बलात्कार किया। गोवा का वह केस भी अभी तक जेहन में ताजा है, जिसमें एक लड़की को सिगरेट में नशीला पदार्थ देने के बाद उसी के दोस्तों ने लड़की के साथ बलात्कार किया था। दिल्ली में भी दो साल पहले एक ब्रिटिश महिला के साथ उसी के होटल रूम में नशीला पदार्थ खिला कर एक दोस्त ने बलात्कार किया था।

इन तीनों ही घटनाओं में जो कॉमन चीज है, वह है कि बलात्कार करने वाला लड़की का दोस्त और भरोसेमंद था, लेकिन मौका मिलते ही उसने लड़की के साथ बलात्कार कर दिया। वास्तव में समाज में जो खुलापन आ रहा है, उसने लड़कियों को भी सेक्स के मामले में उन्मुक्त होने का मौका दिया है और पुरुष इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। पश्चिमी दुनिया से आई डेट रेप की अवधारणा अब भारत में भी दिखाई दे रही है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक लड़की ने नाम ना लिखने की शर्त पर बताया कि यहां पढ़ने वाली कई लड़कियां डेट रेप का शिकार होने से बची हैं। मजबूरी में वे ऐसे मामलों की कोई शिकायत भी दर्ज नहीं करवातीं। दिल्ली की ही रहने वाली 30 वर्षीया शौर्या रॉय कहती हैं कि मुझे कुछ साल पहले की एक घटना याद है। मैं फार्महाउस में एक पार्टी में थी। मैंने देखा कि वहां एक कमरा अंदर से बंद है। मैंने सोचा शायद वहां कोई कपल होगा। मैं वहां से जाने ही वाली थी कि किसी ने मुझे बताया कि मेरी ही एक दोस्त ने बहुत ज्यादा पी ली थी और एक लड़का उसे उस कमरे में ले गया है। वह लड़का मेरी दोस्त को बहुत ज्यादा जानता भी नहीं था। हम सब कमरे की ओर भागे। दरवाजा खुलवाया तो हमने देखा कि लड़की एकदम निर्वस्त्र पड़ी थी। लड़के को धक्के मार कर बाहर निकाला गया। लड़की को कपड़े पहनाये गए। काफी देर बाद उसे होश आया। बाद में लड़की ने इसकी शिकायत करवाने से भी इनकार कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील और महिलाओं के मुद्दों पर नियमित रूप से लेखन करने वाले अरविंद जैन कहते हैं कि डेट रेप के मामले में लड़की शिकायत करती है तो भी उसका पक्ष कमजोर हो जाता है, क्योंकि वह लड़के को जानती है, अपनी मर्जी से उसके पास गई होती है। बस आरोपी के वकील को यह साबित करना होता है कि सेक्स संबंध बनाने में लड़की की भी उतनी ही रुचि थी, जितनी लड़के की। वह आगे कहते हैं कि यूं तो देश में बलात्कार कानून में वैसे ही इतने लूपहोल्स हैं, लेकिन डेट रेप के मामले में तो अक्सर फैसला लड़कों के ही पक्ष में होता है।

अक्सर लड़कियां भी यह समझती हैं कि डेट पर जाने का अर्थ है सेक्स के लिए सहमति देना। लड़कियों के पास सेक्स संबंध बनाने से मना करने का अधिकार है। वे कभी भी इससे इनकार कर सकती हैं। लड़कियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि डेट पर जाने के लिए हां कहने का अर्थ यह नहीं है कि वे सेक्स के लिए भी तैयार हैं।


शादी का वादा और सेक्स का इरादा
पिछले दिनों दिल्ली की एक अदालत ने लड़कियों को आगाह करते हुए कहा कि वे महज शादी के वादे के बाद ही अपने बॉयफ्रैंड से शारीरिक संबंध ना बनाएं, बल्कि अपनी अक्ल का भी इस्तेमाल करें। गौरतलब है कि जून 2006 में एक लड़की ने कालकाजी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। इस शिकायत में कहा गया था कि उसका बॉयफ्रैंड चार साल से शादी का वादा करके उसके साथ बलात्कार कर रहा है।

इस मामले में एडिशनल सेशन जज अरुण कुमार आर्य ने शादी का झांसा देकर लड़की को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने के मामले में कहा कि अपने शरीर की हिफाजत करना किसी भी लड़की का मौलिक दायित्व है। जस्टिस आर्य ने दिल्ली हाईकोर्ट के हाल के एक फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के वादे पर यकीन कर लड़कियों का पुरुषों से नजदीकी बढ़ाना आत्मघाती होगा और स्वच्छंदता के दायरे में आएगा।

दिलचस्प बात है कि शादी का ही नहीं, अन्य वादों के बाद भी लड़कियां पुरुषों से शारीरिक संबंध बना लेती हैं। इसका ताजा उदाहरण है ‘फैशन’ और ‘जेल’ जैसी हिट फिल्मों के निर्देशक मधुर भंडारकर पर प्रीति द्वारा लगाए गए आरोप। इनमें प्रीति ने कहा है कि मधुर ने उन्हें अपनी फिल्म की नायिका बनाने का वादा किया था और इस दौरान उन्होंने कई बार उससे सेक्स संबंध बनाए। जाहिर है प्रीति को फिल्मों में रोल नहीं मिला। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, पर यह तय है कि इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें लड़कियां किसी भी बहकावे में आकर लड़कों से शारीरिक संबंध बना लेती हैं और उसके बाद पछताती हैं।


डेट रेप ड्रग
डेटिंग के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा, लेकिन शायद डेट रेप ड्रग के बारे में ना सुना हो। भारतीय ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी पिछले कुछ सालों से परेशान करने वाले एक ट्रैंड को नोट कर रही हैं। यह ट्रैंड है, गैर कानूनी ढंग से कैटेमाइन हाइड्रोक्लोराइड नामक ड्रग का निर्यात। कारण? यह ड्रग भारत में प्रतिबंधित नहीं है और यहां अच्छी गुणवत्ता वाला कैटेमाइन मिलती है। अब सवाल यह है कि इस ड्रग का क्या और कहां इस्तेमाल किया जाता है। मुख्य रूप से कैटेमाइन का प्रयोग रेव पार्टियों में किया जाता है। यह एक रंगहीन और बिना गंध वाला पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल लड़के लड़कियों को बेहोश करने के लिए कर सकते हैं और कर रहे हैं। शरीर के भीतर पहुंचने के बाद लड़की कई घंटों तक होश में नहीं आती और बेहोशी की हालत में लड़के लड़की के साथ बलात्कार कर लेते हैं।


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