अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गलती ना बन जाए गोली

गलती ना बन जाए गोली

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन विवाहित महिलाओं की तुलना में स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली किशोरियां ज्यादा कर रही हैं। किस तरह ये गर्भनिरोधक गोलियां कच्ची उम्र की लड़कियों के स्वास्थ्य को खराब कर सकती हैं।

आपने अपने टेलीविजन स्क्रीन पर अक्सर गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़े विज्ञापन देखे होंगे। आजकल बाजार में ऐसी बहुत-सी कंपनियां हैं, जो दावा करती हैं कि इन गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से गर्भ ठहरने का खतरा ना के बराबर होता है। लेकिन यह भी सच है कि ये कंपनियां इन गोलियों के सेवन से जुड़े दुष्परिणामों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं देतीं। इन कंपनियों का दावा है कि कोई भी महिला इन गोलियों का सेवन करने से आसानी से गर्भवती होने के डर से निजात पा सकती है- वह भी बिना किसी ऑपरेशन के।

लेकिन आपको ये जानकर शायद हैरानी होगी कि इन गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन विवाहित महिलाओं की तुलना में स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली किशोरियां ज्यादा कर रही हैं। राजधानी दिल्ली के एक नामी पब्लिक स्कूल की नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्र रुचि (बदला हुआ नाम) का कहना है कि आजकल लड़कियों के अपने बॉयफ्रेंड के साथ शारीरिक संबंध होते हैं। ऐसे में इन गोलियों के इस्तेमाल से वे आने वाले खतरे से अपने आपको सुरक्षित रख सकती हैं।

राजधानी के एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं कक्षा की छात्र नैना (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि वो अक्सर अपने पुरुष मित्रों के साथ डिस्को और दूसरी जगहों पर जाती हैं, जहां जरूरत पड़ने पर उसने भी एक-दो बार इनमें से ही किसी एक गोली का सेवन किया है।

सर गंगाराम अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. माला श्रीवास्तव बताती हैं कि इन गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन अक्सर घातक साबित हो सकता है। इन गर्भनिरोधक गोलियों का ज्यादा इस्तेमाल करने से महिलाओं में अनियमित माहवारी होना, लगातार वजन बढ़ना, हारमोनल असंतुलन होना, स्तन कैंसर, योनि संबंधित रोग और सरवाइकल कैंसर भी हो सकता है, इसलिए इन गोलियों का सेवन अगर आपको अक्सर करना पड़ रहा हो तो आप अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ की जानकारी के बगैर न करें। कच्ची उम्र में किशोरियां अकसर ऐसी गलती कर बैठती हैं, जिनसे जुड़े घातक परिणामों को झेलने से वे घबराती हैं। भले ही उनकी गलतियों की जानकारी उनके मित्रों को भी होती है, लेकिन युवा आजकल कम उम्र में शारीरिक संबंध बनाने को एक आम चीज मानते हैं। और अगर उन्हें बाजार में ही ऐसे विकल्प मिल जाएं जो उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के बाद के दुष्परिणामों से बचा सकें तो उनके लिए इससे बड़ी अच्छी बात कोई और नहीं है।

मनोचिकित्सक डॉ. अमित डोगरा बताते हैं कि आजकल माता-पिता का अपने बच्चों के साथ मित्रों जैसे पेश आना बेहद जरूरी है, ताकि उनके बच्चों उन्हें अपनी समस्या बताने में संकोच न करें। अगर उनके बच्चों से कोई गलती हो भी गई है तो बजाय उसे सजा देने के उनका मित्र बन कर उनकी समस्या को सुनें और उसे समझने का प्रयास करें। आजकल का युवा वर्ग अपने अच्छे और बुरे की जिम्मेदारी स्वयं लेने को तैयार रहता है। ऐसे में उनका एक गलत कदम उन पर या उनके विकसित होते हुए शरीर पर बुरा प्रभाव न छोड़े, इसके लिए उन्हें किसी भी दवा का सेवन करने से पहले उससे जुड़े अच्छे-बुरे परिणामों पर जरूर गौर करना चाहिए।          

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गलती ना बन जाए गोली