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देवानंद व मेरे लिए कुछ असंभव नहीं: शेखर कपूर

देवानंद व मेरे लिए कुछ असंभव नहीं: शेखर कपूर

सदाबहार अभिनेता देवानंद से आठ साल बाद मुलाकात करने वाले अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त फिल्मकार शेखर कपूर का कहना है कि उनके संबंधी देवानंद कर्मयोगी और पूरी तरह से भयहीन हैं। शेखर कहते हैं कि वह कई मायनों में सदाबहार अभिनेता जैसे हैं।

छह दिसम्बर को 64 वर्ष के हुए कपूर ने कहा कि जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो अचानक महसूस करता हूं कि मैं अद्भुत शख्सियत के मालिक देव साहब से पूरे आठ वर्षों से नहीं मिला हूं। मैंने अपने आप से कहा कि यही समय है कि मैं उनके जीवन के विषय में कुछ जानने की कोशिश करूं।

86 वर्षीय देवानंद के विषय में कपूर कहते हैं कि वह कर्मयोगी और पूरी तरह से भयहीन हैं। मैं भयहीन होने की वजह से खुद की प्रशंसा करता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि वह मुझसे भी ज्यादा भयहीन हैं। वह कहते हैं कि उनके और देव साहब के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। कपूर को लंबे समय तक देव साहब के संपर्क में न रहने का अफसोस है।

वह कहते हैं कि गोल्डी (विजयानंद) साहब के निधन के बाद भी मैं नहीं मिला। यह मेरी गलती है। हाल के वर्षों में मैं लगातार यात्रा करता रहा हूं। अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों से गुजरने के बावजूद लगातार फिल्में बनाने के लिए उत्साहित रहे इस अद्भुत व्यक्ति से मेरे दोबारा जुड़ने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वह जहां भी जाते हैं, उनका स्वागत होता है और तालियां बजाई जाती हैं। हो सकता है लोग उनकी फिल्में और अधिक न देखना चाहें लेकिन वह जहां भी जाते हैं उनके लिए लोगों का प्यार बढ़ रहा है।

हिंदी फिल्म उद्योग के महान अभिनेता देवानंद ने 'मुनीमजी', 'सीआईडी', 'हम दोनों', 'ज्वेल थीफ' और 'जॉनी मेरा नाम' जैसी फिल्मों में अभिनय तथा 'हरे रामा हरे कृष्णा' और 'देस परदेस' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है।

कपूर ने 'मासूम', 'मिस्टर इंडिया' और 'बैंडिट क्वीन' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। 'एलिजाबेथ' और 'फोर फीदर्स' का निर्देशन कर उन्होंने हॉलीवुड में भी अपनी जगह बनाई है।

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