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रामसेतु पर सरकार को लगी फटकार

रामसेतु पर सरकार को लगी फटकार

रामसेतु विवाद पर हीला हवाली कर रही केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खूब आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने पूछा कि सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट का वैकल्पिक मार्ग ढूंढ़ने के लिए कमेटी डेढ़ वर्ष पूर्व गठित कर दी गई थी लेकिन उसने अभी तक अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं दी? आखिर सरकार को और कितना समय चाहिए? मुख्य न्यायायधीश की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ के सवालों से असहज हुए अतिरिक्त सालिसिटर जरनल एचपी रावल ने कोर्ट से कहा कि वह सरकार और डा. पचौरी से सीधे बात करेंगे और फरवरी के दूसरे सप्ताह में पीठ को ठोस जानकारी देंगे।

रावल ने रिपोर्ट तैयार करने तथा उसका विश्लेषण करने के लिए कुछ और समय की मांग की थी लेकिन कोर्ट के रुख को देखते हुए उन्होंने कहा कि वह कमेटी से आग्रह करेंगे कि फरवरी माह में एक संक्षिप्त रिपोर्ट कोर्ट को दें ताकि कोर्ट किसी नतीजे पर पहुंच सके। पीठ को केंद्र सरकार की इस विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आते ही इस मामले में वह अपना फैसला सुना देगी। यह कमेटी पर्यावरणविद डा. आरके पचौरी की अध्यक्षता में काम कर रही है।

रावल ने नेशनल ओशनोग्राफी संस्थान (एनआईओ) की रिपोर्ट को सिर्फ प्रारंभिक इनपुट बताया और कहा कि इसमें ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि प्रोजेक्ट पयार्वरण के लिए घातक है। संस्थान चाहता है कि प्रोजेक्ट के लिए समुद्र का एक पूरे वर्ष अध्ययन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी। पीठ ने यह सवाल तब किया जब याचिकाकर्ता जनता पार्टी के अध्यक्ष डा. सुब्रहमण्यम स्वामी ने कहा कि रिपोर्ट देर से देने पर केस पर बुरा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि तब तक (मई 2010) मुख्य न्यायाधीश रिटायर हो जाएंगे।

उनके रिटायर होने पर इस मामले की दोबारा नए सिरे से सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई 08 को इस मामले में फैसला सुरखित रख केंद्र सरकार से रामसेतु को बचाने के लिए समुद्री नहर प्रोजेक्ट सेतु समुद्रम का वैकल्पिक मार्ग तलाशने को कहा था।

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