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पानी कम, घटा बिजली उत्पादन


मौसम की बेरुखी जल विद्युत परियोजनाओं पर भारी पड़ रही है। एक सप्ताह के भीतर पानी के डिस्चार्ज में आयी कमी से दो परियोजनाओं में 394 के सापेक्ष 85 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम की 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम व 304 मेगावाट की द्वितीय चरण परियोजना पर पानी का संकट जारी है।

गत वर्ष की तुलना में भागीरथी के जलागम क्षेत्र में लगभग 5 से 10 क्यूमेक्स पानी का प्रवाह कम होने से निगम को प्रति दिन लाखों रुपये की चपत लग रही है जबकि असी गंगा व प्रथम चरण के ऊपर पिलंग गाड समेत अन्य सहायक नदियों में भी डिस्चार्ज में भारी कमी ने भागीरथी को सूखा दिया है।

90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण में दिनभर 30 मेगावाट ही उत्पादन हो रहा है। जलभराव पर बमुश्किल दो घण्टे 60 मेगावाट उत्पादन लिया जा रहा है। गत वर्ष की तुलना में प्रथम चरण अकेले नवंबर माह में 5 मिलियन यूनिट के घाटे में चल रही है।

304 मेगावाट की द्वितीय चरण पर तो पानी ऊंट के मुंह में जीरा जैसा नजर आ रहा है। नदी में लगभग पानी का डिस्चार्ज 26.41 क्यूमेक्स जाने से दिनभर 55 मेगावाट व एक-आध घण्टे 110 मेगावाट उत्पादन लिया जा रहा है। पानी के संकट से प्रभावित चल रहे विद्युत उत्पादन से विभाग का वार्षिक लक्ष्य ही बिगड़ता नजर आ रहा है।

गत वर्ष की तुलना करें तो इस बार प्रति माह निगम का उत्पादन शुरूआती दौर से ही लुढ़क गया था, जो अब तक जारी है। द्वितीय चरण में परियोजना शुभारंभ से लेकर अब तक उत्पादन में भारी गिरावट आ रही है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से पानी के स्नोत सूख गये हैं। इसमें सुधार की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

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