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पहली बार पहुंची मोटर तो नाच उठे

गढ़कोट की रहने वाली 95 साल की शबरी देवी, 88 साल के अजीत सिंह और 85 साल के चित्रमणि विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि, उनके गांव तक सड़क पहुंच गई है। सड़क बनने के बाद सोमवार को जब गांव में पहली बार मारुति कार पहुंची तो मारे खुशी के उनकी आंखें छलछला गईं।

ग्रामीणों की पिछली पीढ़ियां पहाड़ की पगडंडियां पैदल नापते ही मर-खप गई। सड़क के लिए अफसरों और नेताओं से विनती की, पर वह टरकाते ही रहे। चार साल पहले कुछ युवाओं ने श्रमदान के जरिए गांव तक सड़क लाने की ठानी। बाद में विधायक और ब्लॉक प्रमुख इस काम में मददगार बने। सोमवार को जब गांव में पहली बार गाड़ी पहुंची तो गांव वाले ढोल-नगाड़े बजा कर नाचने लगे।

पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लॉक का एक गांव है गढ़कोट। गांव वाले 1969 से सड़क बनाने की मांग करते आ रहे थे। लेकिन घंडियाल से गढ़कोट तक साढ़े तीन किमी सड़क बनाने को कोई राजी नहीं हुआ।

चार साल पहले लोक निर्माण विभाग ने सड़क बनाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान से गांव तक सड़क बनाने का कार्य शुरू कर दिया। लेकिन एक विशालकाय चट्टान ने उनकी राह रोक ली।

ग्रामीणों के जज्बे को देख विधायक बृजमोहन कोटवाल, ब्लॉक प्रमुख डॉ. लाजवंती असवाल और जिला पंचायत सदस्य दिनेश रावत ग्रामीणों के मददगार बने। ग्रामीण धीरेंद्र रावत की देखरेख में साढ़े तीन किमी लंबी यह सड़क बहुत कम पैसे में गांव तक पहुंच गई।

सोमवार को पहली बार एक मारुति कार गांव में पहुंची। गांव में गाड़ी पहुंचने पर गांव वालों का उत्साह देखने लायक था। मारे खुशी के ग्रामीण ढोल नगाड़े लेकर कार के आगे नाचने लगे। उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकीं दौंथी देवी और सुरेंद्र सिंह के चेहरों पर आनन्द का यह क्षण देखने लायक था।

उनका कहना था कि, ‘हमने तो जीते जी गांव में गाड़ी आने की आस छोड़ ही दी थी।’ ग्राम प्रधान प्रधान सरस्वती देवी, भगवंती देवी व उर्मिला देवी देवी का कहना था कि, सड़क तो पहुंच गई, अब एक हैंड पम्प गांव में लग जाए तो गांव के सारे संकट दूर हो जाएगे।

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