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नीतीश पूर्वाचल व झारखण्ड को बिहार में मिलाने के पक्ष में

नये राज्यों के गठन पर भड़के विवाद से अलग लाइन लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यूपी के पूर्वाचल इलाके के साथ ही झारखण्ड को भी बिहार में शामिल करने की आवश्यकता जतायी है। सोमवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से नुकसान नहीं होगा लेकिन यह काम टुकड़े-टुकड़े में नहीं होना चाहिए। केन्द्र राज्यों के पुनगर्ठन के लिए एक राष्ट्रीय आयोग बनाये और उसके सुझाव के आधार पर नये सिरे से तमाम राज्यों की सीमाओं का निर्धारण किया जाए। राज्यों का पुनर्गठन मजाक नहीं है। यूपीए सरकार ने रात में अचानक तेलंगाना की घोषणा करके संघीय ढांचे पर हमला किया है।


पूर्वाचल के संबंध में यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री कुमार ने कहा कि हमारा मकसद बिहार को बनाना है और हम इसी विषय में बोलेंगे। हम राज्यों के पुनर्गठन के हिमायती हैं। (आई एम फेवरिंग री-ऑर्गनाइजेशन) पुनर्गठन का मतलब सिर्फ विभाजन ही नहीं, ‘मर्जर’ भी होता है। बिहार के भी पुनर्गठन की गुंजाइश है। वैसे भी देश में अगर कहीं हिन्दीभाषियों के साथ कोई घटना होती है तो यही कहा जाता है कि बिहारी के साथ मारपीट हो गयी। बिहार एक बड़ी छतरी बन गया है। अच्छा हो कि सबको एक ही छतरी के नीचे कर दिया जाए।


तेलंगाना प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तेलंगाना मामले में कांग्रेस ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे लोकसभा में उसका दो-तिहाई बहुमत हो। केन्द्र ने बैठे-बिठाये एक नये विवाद को जन्म दे दिया है। यह मामला अब कौन सा रूख लेगा कहना मुश्किल है। तेलंगाना का मामला फंस गया है। यह राज्य बने या न बने, दोनों हालत में केन्द्र ही संकट में है। यूपीए सरकार ने बहस के हालात पैदा किये हैं। अब समाधान भी उसी को करना पड़ेगा। इस प्रकरण से ही पता चल जायेगा कि केन्द्र आंध्रप्रदेश का कितना ख्याल रखता है। इस सवाल पर कि अगर पूर्वाचल की मांग जोर पकड़ती है तो क्या बिहार के दस जिलों को उसमें शामिल किया जायेगा, मुख्यमंत्री ने कहा कि हो सकता है कल कोई पटना को तमिलनाडु में शामिल करने की मांग कर दे। मुङो इससे अधिक कुछ नहीं कहना है।

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  • Web Title:पूर्वाचल व झारखण्ड को बिहार में मिल जाए