class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दृढ़ निश्चय

स्वामी विवेकानन्द ने लक्ष्य एवं आदर्श की एकनिष्ठा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा है- ‘जीवन में अभीष्ट सफलता चाहते हो तो एक आदर्श को लो, उसका चिंतन-मनन करो, उसी को अपने सपने में पा लो और उसी को अपना जीवन बना लो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, स्नायुतंत्र व समूचे अंग-प्रत्यंगों को इसी आदर्श के विचार से ओतप्रोत कर दो और अन्य विचारों को एक तरफ हटा दो। फिर देखो सफलता कैसे तुम्हारे कदम चूमती है। यदि तुम अपना जीवन सफल बनाना चाहते हो व समूची मानवजाति के लिए वरदान चाहते हो तो तुम्हें गहराई में जाना होगा।’ दृढ़ निश्चयी व उद्देश्यनिष्ठ व्यक्ति जीवन की विषम परिस्थितियों के बीच भी अपना मार्ग खोज लेते हैं। साधन सहयोग का अभाव या प्रतिकूल परिस्थितियां उन्हें नहीं रोक सकतीं।

दृढ़ संकल्प में अद्भुत शक्ति है, उससे प्रेरित व्यक्ति दृढ़ता व लगन के साथ आगे बढ़ता है। दृढ़ संकल्प पीछे लौटने के सभी रास्तों को बंद कर देता है और आगे की बाधाओं को रौंद डालता है। अब्राह्म लिंकन ने स्वाधीनता संघर्ष के समय अपनी डायरी में लिखा था कि मैंने ईश्वर के आगे यह प्रण किया है कि मैं इस काम को अवश्य पूरा करूंगा। इस प्रण ने ही उन्हें वह सामथ्र्य दी, जिससे वे उस कार्य को पूरा कर सके और आपातकाल में देश को सफल नेतृत्व देने में समर्थ हुए। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता का मूल मंत्र व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति, अटूट विश्वास एवं एकनिष्ठ प्रयास है। अन्य बातें समान होने पर भी अनेक व्यक्तियों में से वही सफल होता है जिसकी इच्छाशक्ति सबसे प्रबल और अधिक पूर्ण होती है।

चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस का कहना था कि एक विशाल सेना के सेनापति को हटाया जा सकता है, किन्तु एक मनुष्य की दृढ़ इच्छाशक्ति को कोई नहीं हटा या झुका सकता। लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यकता इतने भर की है कि हमें उसे पूर्णरूपेण चाहना होगा, न कि एक समय में सैकड़ों अन्य चीजों को उतनी ही तीव्रता से चाहें। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दृढ़ निश्चय