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बिजली की फ्रैंचाइज वितरण पर विचार करेगी सरकार

गुड़गांव और पानीपत में बिजली के लिए फ्रैंचाइज वितरण को लेकर खड़े हुए विवाद पर सरकार ने कहा है कि इस उद्देश्य के लिए बोली आमंत्रित करने से पहले प्रक्रिया का भली-भांति अध्ययन किया जाएगा और समुचित विचार-विमर्श तथा विस्तृत चर्चा के बाद ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

इसी बीच इनेलो के प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने आरोप लगाया है कि गुड़गांव व पानीपत में बिजली सप्लाई प्राइवेट हाथों में देने की असल वजह यह है कि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कुछ बड़े बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब कर रहे हैं।

उनका कहना था कि गुड़गांव व पानीपत सर्कलों की रिकवरी सबसे अच्छी है और लाइन लॉसेज भी सबसे कम हैं। अगर लाइन लॉसेज व रिकवरी के आधार पर ही कोई सर्कल प्राइवेट हाथों में देना है तो उन्हें सबसे पहले रोहतक को निजी हाथों में देना चाहिए क्योंकि सबसे ज्यादा लाइन लॉस वहां और फरीदाबाद सर्कल में हैं। रोहतक अकेले में 55 फीसदी के लगभग लॉसेज हैं। 

एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि दो शहरों में फ्रैंचाइज वितरण की इस पायलट योजना को ऊर्जा की उपयोगिता, उपभोक्तओं व प्रदेश हितों को ध्यान में रखते हुए प्रयोग के तौर पर प्रस्तावित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके तहत बिजली वितरण इकाइयों की सम्पत्ति का कोई निजीकरण नहीं किया जा रहा है और न ही किसी भी कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।

उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही विभिन्न वर्गो के लिए निर्धारित बिजली की दरें हरियाणा बिजली विनियामक आयोग द्वारा निर्धारित की जाती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि समाचार पत्रें ने बिजली अधिनियम-2003 की धारा 12 व 262 को गलत तरीके से उल्लेख किया है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के इंजीनियरों ने महाराष्ट्र के भिवडीं का दौरा करके इस बात का पता लगाने का प्रयास किया था कि फ्रेंचाइस के अनुभव का वहां पर क्या प्रभाव पड़ा है।

फ्रेंचाइस कम्पनी द्वारा पिछले दो वर्षो के दौरान भिवडीं में एटी और सी लॉसिस 58 प्रतिशत से कम करके 24 प्रतिशत तक लाया गया है। सरकार भिवडीं, नागपुर, आगरा और कानपुर सहित सभी शहरों में लागू किये गये फ्रेंचाइस के मामलों का अध्ययन करेगी और उसके बाद ही उपरोक्त शहरों के अनुभव के बाद ही गुड़गांव और पानीपत में इसे मॉडल के रूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सरकार ने सभी स्टेक होल्डर से अपील की है कि वे उपभोक्ताओं, बिजली कम्पनियों और राज्य सरकार के हितों को ध्यान में रखे।

जो उपभोक्ता बिजली वितरण की क्षमता में सुधार के पक्षधर है और बेहतर किस्म की सुनिश्चित बिजली सप्लाई चाहते है तो उनको तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनानी चाहिए न की अपने स्वार्थो के लिए अपने हितों का ध्यान रखने वाले दिग्भ्रमित लोगों से गुमराह होना चाहिए।

गुड़गांव और पानीपत में फ्रेंचाइस पायलट योजना के आधार पर एक तजुर्बे के रूप में किया जा रहा है और इसको बड़े ध्यानपूर्वक विचार विमर्श करने के बाद सभी से परामर्श लेकर और सभी प्रकार के अनुभवों की समीक्षा करके और एक विस्तृत अध्ययन के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।

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